नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए भूखंड में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर की मौत मामले के बाद उठाया कदम।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्राधिकरण अब आधुनिक तकनीक के साथ एआई, सेंसर और वास्तविक समय निगरानी प्रणाली जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी की भी मदद लेगा। भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी पानी जमा न होने पाए। यह प्रयास प्राधिकरण ने दनकौर में तीन साल के बच्चे व नोएडा सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए भूखंड में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर की मौत मामले के बाद उठाया है।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्राधिकरण ने बीते साल ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जलभराव वाले 20 से अधिक स्थानों को चिह्नित किया था, इस पर अब सलाहकार एजेंसी अर्शिया कंसल्टिंग इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड से स्थायी समाधान के लिए सुझाव मांगा है।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में कई स्थानों पर वर्षा में जलभराव हो जाता है। आबादी के बीच स्थित तालाबों से भी हादसे का खतरा बना रहता है। बिल्डरों की साइट पर निर्माण कार्य भी चलता रहता है।
इसे देखते हुए प्राधिकरण ने जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की योजना पर काम शुरू कर दिया है। जल निकासी के लिए नाली का निर्माण कराया जा रहा है। सलाहकार एजेंसी के सुझावों के आधार पर जरूरी कार्य कराए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं पर भी जलभराव की समस्या न हो।
सलाहकार एजेंसी ने अब तक कुछ स्थानों को लेकर सुझाव नहीं दिया है। ऐसे में जल निकासी को लेकर काम नहीं हो पा रहा है। बीते माह नोएडा के सेक्टर-150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में कार गिरने से साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता और बीते सप्ताह दनकौर के दलेलगढ़ गांव में एक धार्मिक स्थल के समीप पानी से भरे गड्ढे में डूबकर तीन साल के मासूम देवांश की मौत की घटना से प्राधिकरण के अधिकारी हरकत में आए है।
इस तरह की घटना की पुनरावृति न हों, इसके लिए दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा के उपाय तेज कर दिए गए हैं। गड्ढों को भरने, खुले नालों के किनारे दीवार बनाने सहित अन्य उपाय किए जा रहे हैं। एहतियात के तौर पर बेरिकेडिंग की गई है। प्राधिकरण के अधिकारी के मुताबिक जलभराव वाले स्थानों की समीक्षा की जा रही है, कि अब तक क्या- क्या काम हुआ है।
“जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। जल निकासी के लिए नाली का निर्माण कराया जा रहा है। सलाहकार एजेंसी के सुझावों के आधार पर जरूरी कार्य कराए जाएंगे।“
-एके सिंह, महाप्रबंधक परियोजना, ग्रेटर नोएडा।
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