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236 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी केस PMLA कोर्ट का बड़ा फैसला, रिचा इंडस्ट्रीज के पूर्व एमडी की जमानत खारिज

deltin33 Yesterday 23:28 views 559
  

अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच के चलते जमानत देना उचित नहीं है।



महावीर यादव, बादशाहपुर (गुरुग्राम)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश वाणी गोपाल शर्मा व विशेष अदालत (पीएमएलए) ने 236 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी और मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में आरोपित संदीप गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच के चलते जमानत देना उचित नहीं है।

अदालत में दायर याचिका में संदीप गुप्ता ने दलील दी थी कि उन्हें 20 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया। जबकि पिछले लगभग पांच वर्षों की जांच के दौरान वे जांच एजेंसियों के समक्ष नियमित रूप से पेश होते रहे और सहयोग करते रहे। मामला मुख्य रूप से दस्तावेजों, बैंक रिकाॅर्ड और फोरेंसिक ऑडिट पर आधारित है। इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है और लंबी न्यायिक हिरासत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

ईडी की ओर से दायर जवाब में आरोप लगाया गया कि संदीप गुप्ता, रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर एवं प्रबंध निदेशक के रूप में, बैंक ऋण में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, फर्जी बिक्री दिखाकर टर्नओवर बढ़ाने, शेल कंपनियों के जरिए धन की हेराफेरी करने और दिवालिया प्रक्रिया के दौरान भी संपत्तियों को छिपाने व स्थानांतरित करने में शामिल रहे हैं।

जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपित ने 2015 से 2019 के बीच विभिन्न तरीकों से बैंकों से लिए गए ऋण का दुरुपयोग कर लगभग 236 करोड़ रुपये की अवैध आय उत्पन्न की और उसे वैध दिखाने के लिए जटिल लेनदेन की परतें बनाई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकाॅर्ड पर उपलब्ध फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट, धारा 50 पीएमएलए के तहत दर्ज बयान और डिजिटल साक्ष्य प्रथम दृष्टया यह दर्शाते हैं कि आरोपित कंपनी के वित्तीय और परिचालन निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। अदालत ने माना कि यह एक जटिल आर्थिक अपराध है। जिसमें बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

विशेष अदालत ने यह भी कहा कि पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित ‘ट्विन कंडीशंस’ इस चरण पर पूरी नहीं होती। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि आरोपित प्रथम दृष्टया अपराध में शामिल है और रिहा होने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता, कथित धनराशि का परिमाण और चल रही जांच को देखते हुए इस समय जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने संदीप गुप्ता की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।

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