Mahabharata Story: महाभारत की कथा (Image Source: Freepik)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत का युद्ध केवल जमीन के टुकड़े के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय की लड़ाई थी। युद्ध के 16वें दिन एक ऐसी घटना घटी जिसने कौरवों के खेमे में दहशत भर दी और पांडवों के वर्षों पुराने जख्मों पर न्याय का मरहम लगाया। यह दिन था भीम द्वारा अपनी उस भीषण प्रतिज्ञा को पूरा करने का, जो उन्होंने भरी सभा में ली थी।
इस कहानी की शुरुआत युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि सालों पहले हस्तिनापुर की उस सभा से होती है। जहां द्रौपदी का चीर-हरण करने का दुस्साहस किया गया था। दुशासन ने न केवल द्रौपदी को बालों से खींचकर सभा में लाया, बल्कि उनका अपमान करने की हर सीमा पार कर दी थी। उस वक्त भीम ने क्रोध में भरकर प्रतिज्ञा ली थी कि, “मैं युद्ध के मैदान में दुशासन की छाती चीरकर उसका लहू पीऊंगा और उसी लहू से द्रौपदी अपने बाल धोएगी।“
युद्ध का 16वां दिन
महाभारत के युद्ध के 16वें दिन, जब सूर्य अपने पूरे तेज पर था, भीम और दुशासन का आमना-सामना हुआ। भीम उस समय काल के समान लग रहे थे। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जैसे ही भीम ने दुशासन को देखा, उनके आंखों के सामने सालों पुरानी वो बेइज्जती नाचने लगी। दोनों के बीच भयंकर गदा युद्ध हुआ, लेकिन भीम का वेग आज किसी के रोके नहीं रुकने वाला था।
भीम ने अपनी गदा के एक जोरदार प्रहार से दुशासन के रथ को चकनाचूर कर दिया। दुशासन जमीन पर गिर पड़ा और भीम उस पर शेर की तरह झपट पड़े। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीम ने अपनी असीम शक्ति का प्रयोग करते हुए दुशासन को उठा-उठाकर पटकना शुरू किया। अंत में, भीम ने दुशासन को जमीन पर लिटाकर उसकी छाती पर अपने घुटने टिका दिए।
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भीषण प्रतिज्ञा की पूर्ति
पूरा कुरुक्षेत्र का मैदान थम गया था, जब भीम ने दुशासन की छाती को अपने हाथों से चीर दिया। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार दुशासन का लहू पिया और दहाड़ते हुए कहा कि आज धर्म की जीत हुई है। इसके बाद, भीम दुशासन का लहू लेकर द्रौपदी के पास पहुंचे। द्रौपदी ने उस लहू से अपने बाल धोए और वर्षों बाद अपने केशों को बांधा।
यह दृश्य इतना भयानक था कि दुर्योधन समेत पूरी कौरव सेना कांप उठी थी। मान्यता है कि यह घटना प्रतीक थी कि जो भी स्त्री के सम्मान के साथ खिलवाड़ करेगा, उसका अंत इसी तरह भयानक होगा।
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