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हाथी ने वृद्ध मजदूर को कुचलकर मार डाला...बचाने के लिए 20 मिनट तक जूझती रहीं पत्नी व बेटी

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वृद्ध मजदूर की मौत के बाद विलाप करते स्वजन। जागरण



संवाद सूत्र, जागरण रेहड़ (बिजनौर)। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व वन रेंज की सीमा के निकट स्थित गांव रानी नांगल में वन क्षेत्र से निकलकर आए हाथी ने एक वृद्ध मजदूर को कुचल कर मार डाला। गुरुवार तड़के वृद्ध घर के पास ही लघुशंका के लिए गए थे, तभी वहां यूके लिप्टिस के पेड़ों के बीच खड़े हाथी ने उनका पैर पकड़कर खींच लिया और उन्हें पटककर मार डाला। वृद्ध की चीख-पुकार सुनकर पत्नी व बेटी उन्हें बचाने के लिए लगभग 20 मिनट तक जूझती रहीं। बाद में कई जगह आग जलाने पर हाथी मौके से भागा। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों व भाकियू पदाधिकारियों ने मुआवजे की मांग को लेकर डेढ़ घंटे तक शव नहीं उठने दिया। बाद में वन विभाग के अधिकारियों के आश्वासन के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

  

अमानगढ़ वन रेंज की सीमा से लगभग एक किलोमीटर दूर गांव रानी नांगल है। यहां काफी दूर-दूर डेरा बनाकर ग्रामीण रहते हैं। यहीं पर 65 वर्षीय सरदार जसवंत सिंह पुत्र गुरदेव सिंह का डेरा है, जिसमें एक कमरा और उसके आगे छप्पर पड़ा है। वह किसानों के यहां खेत पर मजदूरी करते थे। उनके साथ पत्नी प्यारो कौर, विधवा बेटी रजविंदर कौर व उसका 10 वर्षीय बेटा रहते हैं। पत्नी के मुताबिक जसवंत सिंह कमरे के बाहर छप्पर में सोते थे(

गुरुवार तड़के लगभग पांच बजे वह लघु शंका के लिए डेरे के पास कुछ दूरी पर गए थे। उनके डेरे के पास वन विभाग की कई बीघा भूमि पर यूकेलिप्टस के पेड़ लगे हुए हैं। इन्हीं पेड़ों में एक जंगली हाथी खड़ा हुआ था। जसवंत सिंह उसे नहीं देख पाए, इसी दौरान अचानक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। उनका बांया पैर सूंड से पकड़कर खींच लिया और उन्हें पटकने लगा। जसवंत सिंह की चीख सुनकर पत्नी व बेटी उन्हें बचाने पहुंचे लेकिन हाथी ने उन्हें नहीं छोड़ा।

20 मिनट तक बचाने का किया प्रयास
जसवंत सिंह को बचाने के लिए उनकी पत्नी व बेटी लगभग 20 मिनट तक जूझती रही। उन्होंने काफी शोर मचाया और पत्थर व लकड़ी वगैरा हाथी की ओर फेंकी, लेकिन हाथी ने जसवंत सिंह को नहीं छोड़ा। उसने जसवंत सिंह को पटकने के बाद उनका पैर व कमर को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस दौरान पत्नी व बेटी ने घास-फूस इकट्ठी करके कई जगह आग लगा दी। इसके बाद आग से डर कर हाथी भाग गया, सूचना पर पहुंचे आसपास के ग्रामीण और भाकियू पदाधिकारी ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए लगभग डेढ़ घंटे तक शव को नहीं उठने दिया। रेहड़ थानाध्यक्ष संजीव वर्मा और अमानगढ़ वन क्षेत्र अधिकारी अंकिता किशोर द्वारा समझाने और मुआवजे के आश्वासन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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