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जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। नबरंगपुर जिला के 10 ब्लॉकों के 274 गांवों में अब तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंच पाई है। इसके कारण 3,553 परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार छोटे गांवों में सोलर परियोजनाओं के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई गई है, लेकिन हकीकत यह है कि कई सोलर परियोजनाएं लंबे समय से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।
पहले बीजू ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत छोटे गांवों को बिजली से जोड़ने का काम शुरू किया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि इस सोलर योजना के अंतर्गत 71 गांवों में अब तक बिजली कनेक्शन नहीं हो सका।
अप्रैल तक इन 71 गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लक्ष्य अवधि खत्म हुए दो महीने बीत जाने के बावजूद यह अब तक पूरा नहीं हो सका है।
3,553 परिवारों तक बिजली नहीं पहुंच पाई
जिले के नबरंगपुर ब्लॉक के 4 गांवों में 31 परिवार आज भी अंधेरे में रात गुजार रहे हैं। इसी तरह तेंतुलीखुंटी ब्लॉक के 37 गांवों के 233 परिवार, नंदाहांडी ब्लॉक के 4 गांवों के 70 परिवार, पापड़ाहांडी ब्लॉक के 44 गांवों के 498 परिवार, डाबुगांव ब्लॉक के 18 गांवों के 144 परिवार, कोषागुमुड़ा ब्लॉक के 31 गांवों के 424 परिवारों तक बिजली नहीं पहुंच पाई।
इसी तरह उमरकोट ब्लॉक के 24 गांवों के 330 परिवार, रायघर ब्लॉक के 18 गांवों के 209 परिवार, झरीगांव ब्लॉक के 54 गांवों के 1,252 परिवार और चंदाहांडी ब्लॉक के 40 गांवों के 362 परिवार — इस प्रकार कुल 274 गांवों के 3,553 परिवारों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है।
25 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान
इन परिवारों तक जल्द बिजली पहुंचाने के लिए जिला समिति के समक्ष टाटा पावर ने रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें लगभग 25 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया था।
इसके अलावा नंदाहांडी ब्लॉक के पुटुघर गांव के 8 परिवार, तेंतुलीखुंटी ब्लॉक के मंचगांव पंचायत के जलागुड़ा और टांगिणीकोट के 47 परिवार तथा रायघर ब्लॉक के हलदी पंचायत के जंगलिपारा और तुमापारा के 28 परिवारों को 83 सोलर पैनलों के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराने के लिए 41 लाख रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया था।
सोलर परियोजनाएं अब निष्क्रिय
हालांकि कुछ गांवों में पहले सोलर माध्यम से बिजली उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश गांवों में सोलर परियोजनाएं अब निष्क्रिय हो चुकी हैं। जिन गांवों में बिजली नहीं है, वहां लोग लकड़ी या दीबिरी (किरासन/दीपक) जलाकर रात गुजारते हैं।
जिला प्रशासन बार-बार ब्लॉक प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांग रहा है, लेकिन आरोप है कि फील्ड कर्मचारी सही स्थिति छिपाकर गलत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। जिला कलेक्टर डॉ. महेश्वर स्वाईं द्वारा बार-बार समीक्षा किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा काम
इन गांवों के विद्युतीकरण के लिए कार्य-योजना तैयार कर राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी गई है, ऐसा इंजीनियर सुनील कुमार राउत (कार्यकारी अभियंता, टाटा पावर) ने बताया। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू कर दिया जाएगा। |