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Ramadan 2026: रमजान में इफ्तार की शुरुआत खजूर खाकर ही क्यों करते हैं? जानिए धार्मिक कारण

deltin33 3 hour(s) ago views 406
  

Ramadan Iftar: इफ्तार में खजूर का महत्व (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रमजान का महीना इबादत, सब्र और पाकीजगी का महीना है। दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के
लोग सुबह सहरी से शाम इफ्तार तक बिना कुछ खाए-पिए खुदा की इबादत करते हैं। लेकिन, एक चीज जो लगभग हर घर के इफ्तार दस्तरख्वान पर सबसे पहले नजर आती है, वह है \“खजूर\“ (Dates)।

क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर खजूर से ही रोजा खोलने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे न केवल गहरी धार्मिक मान्यता है, बल्कि विज्ञान भी इसे सेहत के लिए बेहतरीन मानता है।
सुन्नत और धार्मिक महत्व (Importance Of Dates)

इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना \“सुन्नत\“ माना जाता है। सुन्नत का मतलब है वो काम जो हजरत मोहम्मद (PBUH) ने स्वयं किए या जिन्हें करने की सलाह दी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर-ए-इस्लाम हमेशा खजूर से ही अपना रोजा इफ्तार करते थे।

खजूर को एक \“मुबारक\“ (Blessed) फल माना गया है। इस्लाम के मुताबिक, अगर किसी कारणवश खजूर उपलब्ध न हो, तो पानी से रोजा खोलने की सलाह दी जाती है क्योंकि पानी पाक करने वाला होता है। लेकिन, पहली प्राथमिकता हमेशा खजूर को ही दी जाती है क्योंकि इसमें बरकत मानी गई है।

  

(Image Source: AI-Generated)
विज्ञान क्या कहता है?

दिन भर भूखे रहने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है। खजूर में प्राकृतिक मिठास (ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) की मात्रा काफी अधिक होती है। जब रोजे रखने वाला व्यक्ति खजूर खाता है, तो उसका ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) तुरंत सामान्य हो जाता है, जिससे दिन भर की थकान मिनटों में दूर हो जाती है।

खजूर फाइबर से भरपूर होते हैं। खाली पेट जब हम अचानक भारी खाना खाते हैं, तो पाचन (Digestion) में दिक्कत हो सकती है। खजूर पेट को आने वाले खाने के लिए तैयार करता है और पाचन प्रक्रिया को आसान बनाता है। इसके अलावा, इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो दिल और दिमाग की सेहत के लिए बहुत अच्छे हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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