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दुल्हन के ढाई लाख के लहंगे का बदल दिया रंग, अब ब्याज समेत लौटानी पड़ेगी कोलकाता के शोरूम को रकम

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लहंगे को दर्शाने के लिए सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।



अली अब्बास, आगरा। दुल्हन ने शादी के लिए पिंक कलर का लहंगा पसंद किया। कीमत थी ढाई लाख रुपये। शोरूम ने डिलीवरी के दौरान लहंगे का रंग बदल दिया।

दुल्हन के स्वजन ने शिकायत की तो शोरूम ने लहंगे को वापस मंगाने के बाद रकम भी नहीं लौटाई तो मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में पहुंच गया।

आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह ने लहंगे का मूल्य ढाई लाख रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत वादनी को दिलाने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक कष्ट एवं वाद व्यय के रूप मे विपक्षी से 15 हजार रुपये भी दिलाने के आदेश दिए।

थाना छत्ता के जीवनी मंडी निवासी रितुल जैन पत्नी सुशांत जैन ने अपने अधिवक्ता सूरज कुमार के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में छह अगस्त 2024 को मुकदमा दायर किया था।

जिसमें अनुश्री जैन प्रोेपराइटर तुभ्यम साड़ी शोरूम कोलकाता के अलावा तीन कोरियर कंपनी को पक्षकार बनाया था।

रितुल जैन के अनुसार उनकी पुत्री की एक मार्च 2024 को होने वाली शादी के लिए विपक्षी अनुश्री जैन के शोरूम से मूव मनीष का पिंक पर्पल रंग का ढाई लाख रुपये का लहंगा, सवा लाख की काली साड़ी, लाल रंग का दो लाख का लहंगा अग्रिम भुगतान करके क्रय किया।

विपक्षी की ओर से पांच जनवरी 2024 तक करने का वादा किया। शोरूम की ओर से उन्हें खरीदे गए सामान की डिलीवरी 31 जनवरी 2024 को की गयी।

पार्सल खोलने पर पता चला कि पिंक पर्पल रंग का जो लहंगा वादनी ने पसंद किया, उसकी जगह विपक्षी ने शैंपेन गोल्डन ब्राउन रंग का लहंगा भेज दिया। जो दुल्हन द्वारा पहनने योग्य रंग नही था।

रितुल जैन के अनुसार विपक्षी अनुश्री जैन से मोबाइल पर बात करने पर उसने आश्वासन दिया कि उक्त लहंगा वापस कर दें। आपके द्वारा पसंद किया लहंगा जल्दी ही भेज दिया जाएगा। वादनी द्वारा आठ फ़रवरी 2024 को कोरियर द्वारा विपक्षी को उक्त लहंगा वापस भेज दिया।

जो विपक्षी को 12 फरवरी को प्राप्त हो गया। मगर, विपक्षी ने ना तो लहंगा भेजा ना ही उसकी धनराशि वापस की। इस कारण पुत्री की शादी के लिए वादनी को दिल्ली से दो लहंगे खरीदने पड़े।

वादनी द्वारा मुकदमा दायर करने पर आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह ने विपक्षी को आदेशित किया कि वह आदेश पारित करने की तिथि से 45 दिन के अंदर लहंगे के मूल्य के रूप में मुकदमा दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत वादनी को अदा करे।

साथ ही वादनी को हुए मानसिक कष्ट एवं वाद व्यय के रूप मे वादनी को 15 हजार रुपये भी अदा करे।
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