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लखनऊ में ATS अधिकारी बन बुजुर्ग दंपती को 14 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 90 लाख ठगे; तीन गिरफ्तार

deltin33 11 hour(s) ago views 715
  



जागरण संवाददाता, लखनऊ। आलमबाग निवासी बुजुर्ग ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राकेश बाजपेयी और उनकी पत्नी वीना बाजपेयी को 14 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर 90 लाख रुपये ठगने वाले तीन लोगों को साइबर क्राइम टीम ने गिरफ्तार किया है।

जालसाजों ने खुद को एटीएस अफसर बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाया और दंपती को शिकार बना लिया। पुलिस ने तीन आरोपितों को जेल भेजकर ठगी के 18 लाख रुपये रिकवर किए हैं।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) साइबर अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि 26 जनवरी 2026 को वीना के मोबाइल फोन पर एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार नाम से एक फोन आया। उसने वीना पर आतंकवाद, मनी लांड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया।

गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए उनसे सिग्नल एप डाउनलोड कराया। एप के माध्यम से अजय प्रताप श्रीवास्तव नाम के युवक ने वीना को फोन किया और उसने खुद को एटीएस का अफसर बताया।

बैंक खातों में जमा रकम की जांच और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर जालसाजों ने वीना और उनके पति के खातों में जमा 90 लाख रुपये 29 जनवरी से नौ फरवरी के बीच ट्रांसफर करा लिए।

जालसाजों ने 11 लाख रुपये और मांगे। रकम ने दे पाने पर दंपती से गाली-गलौज की गई। ठगी का एहसास होने पर पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। डीसीपी के मुताबिक, पुलिस ने जिस खाते में रकम भेजी गई थी उसकी जांच की तो गोरखपुर के पिपराइच स्थित निषाद चौराहा निवासी मयंक श्रीवास्तव का नाम पता चला।

मयंक को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि आर्थिक तंगी और कर्ज लेने के चलते उसकी गाजियाबाद के निवाड़ी निवासी इरशाद से उसकी मुलाकात हुई। इरशाद ने उसे दिल्ली बुलाया और पहाड़गंज के एक होटल में ठहराया।

होटल में इरशाद के साथ ही दिल्ली के प्रेमनगर मुंडका निवासी मनीष उर्फ आकाश और जीतू उर्फ जितेंद्र से मुलाकात हुई। इसके बाद मयंक को चांदनी चौक, नोएडा के परी चौक स्थित होटलों में ठहराया।

जालसाजों ने खाता किराये पर देने के बदले मयंक को 10 हजार रुपये दिए और दो लाख बाद में देने का आश्वासन दिया। मयंक की निशानदेही पर पुलिस ने इरशाद और आकाश को गिरफ्तार किया। पूछताछ में इरशाद ने बताया कि वह तीन प्रतिशत कमीशन के लिए ठगी का काम करता है।

आकाश को भी इतनी ही रकम मिलती है। मयंक के दो बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक आकाश के पास से मिली। उसके खाते में नौ फरवरी को ठगी के कुल 1.06 करोड़ रुपये आए थे।

इस खाते के खिलाफ तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने मयंक, आकाश और इरशाद को जेल भेजा है। जीतू उर्फ जितेंद्र की तलाश जारी है।
नंबर देने वाले की तलाश

साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने बताया कि ठगों को पीड़ितों के नंबर कहां से मिलते थे, यह पता लगाया जा रहा है। जांच में पता चला कि आरोपित समय-समय पर अपने स्थान बदल देते थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए इंटरनेट काल और फर्जी नामों का प्रयोग करते थे।
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