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85% आरक्षण की मांग पर विधानसभा में गरजा RJD, नौवीं अनुसूची में शामिल करने का दबाव

LHC0088 3 hour(s) ago views 634
  

राजद ने बिहार विधानसभा में 85% आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन



राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में आरक्षण की सीमा बढ़ाने का मुद्दा एक बार फिर सियासी केंद्र में आ गया है। बुधवार को विधानसभा परिसर में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं और विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर नेताओं ने आरक्षण की सीमा 85 प्रतिशत करने की मांग उठाई। साथ ही आरक्षण संशोधन प्रस्ताव को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान परिसर में नारेबाजी से माहौल गरमा गया।
जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की दलील

राजद नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाना जरूरी है। उनका तर्क था कि राज्य में पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और आदिवासी समुदायों की आबादी अधिक है।

इसके बावजूद उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। नेताओं का कहना था कि वर्तमान 65 प्रतिशत आरक्षण भी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर 85 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की जा रही है। उन्होंने इसे सामाजिक संतुलन और समान अवसर का सवाल बताया।
नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

राजद विधायकों ने जोर देकर कहा कि आरक्षण संशोधन प्रस्ताव को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाला जाए। उनका मानना है कि इससे आरक्षण कानून को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा मिलेगी। नेताओं ने केंद्र सरकार पर इस दिशा में पहल करने का दबाव बनाने की बात कही।

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प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। राजद ने इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई करार दिया। विधानसभा परिसर में इस मुद्दे को लेकर काफी देर तक चर्चा होती रही।
सियासी हलचल तेज, आगे बढ़ेगी बहस

विधानसभा में हुए इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। आरक्षण की सीमा और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर तीखी बहस की संभावना है।


राजद ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन का रूप दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, 85 प्रतिशत आरक्षण की मांग ने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है।
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