रंगों की होली 4 मार्च को
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार में इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस बना हुआ है। कई लोग 3 मार्च तो कुछ 4 मार्च को रंग खेलने की बात कर रहे हैं। दरअसल, पंचांग के विशेष संयोगों ने इस बार पर्व की तिथि को प्रभावित किया है। 2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाएगा। लेकिन रंगों की होली 4 मार्च को मनाने की सलाह ज्योतिषाचार्यों ने दी है। इसके पीछे भद्रा काल और खग्रास चंद्र ग्रहण का विशेष प्रभाव है।
2 मार्च को होलिका दहन, भद्रा का साया
आचार्य राकेश झा के अनुसार 2 मार्च की शाम 05:32 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। इस दिन भद्रा शाम 05:18 बजे से 3 मार्च सुबह 04:56 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। हालांकि भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन किया जा सकता है। इस साल शुभ मुहूर्त रात 12:50 से 02:02 बजे तक रहेगा। यही 1 घंटा 12 मिनट होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है।
3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल
3 मार्च की शाम खग्रास चंद्र ग्रहण लग रहा है। ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा। सुबह करीब 06:30 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा। सूतक काल में शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। खान-पान और धार्मिक अनुष्ठान भी वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज करने की सलाह दी गई है।
4 मार्च को रंगों की होली
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 4 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग रहेगा। सुबह 07:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूरे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा। साथ ही धृति योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। इस शुभ संयोग में रंगों की होली मनाना मंगलकारी माना गया है। इस दिन अबीर-गुलाल से प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया जाएगा।
होलिका पूजा का धार्मिक महत्व
होलिका दहन के दिन अक्षत, गंगाजल, रोली-चंदन से पूजा की जाती है। आटा, गुड़, तिल, जौ और घी अर्पित कर सात परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि इससे रोग-शोक और नकारात्मकता दूर होती है। ग्रह दोष शांत होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है। होलिका की अग्नि में गेहूं या चना सेंककर प्रसाद लिया जाता है। यह परंपरा परिवार की खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है।
रंगों का संदेश और ज्योतिषीय महत्व
- लाल रंग ऊर्जा और साहस का प्रतीक है।
- पीला रंग आध्यात्मिक तेज और गुरु कृपा से जुड़ा है।
- हरा रंग समृद्धि और सकारात्मकता दर्शाता है।
- नीला रंग शांति और भगवान शिव के भाव का प्रतीक है।
- गुलाबी रंग प्रेम और सौहार्द का संदेश देता है।
- इस बार 4 मार्च को बिहार में पूरे उत्साह से होली मनाई जाएगी।
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