प्रोस्टेट की समस्या को समझें
जागरण संवाददाता, पटना। दैनिक जागरण कार्यालय में मंगलवार को बागबान क्लब की ओर से स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मेदांता अस्पताल के मूत्रविज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. प्रभात रंजन और विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं, लक्षणों और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। परिचर्चा के दौरान उपस्थित लोगों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच भी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि जागरूकता और समय पर जांच से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बागबान क्लब के सदस्य मौजूद रहे।
क्या है प्रोस्टेट और क्यों बढ़ती है समस्या
डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि प्रोस्टेट एक ग्रंथि है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित होती है। यह पेशाब की नली को चारों ओर से घेरे रहती है। उम्र बढ़ने के साथ इसका आकार बढ़ना सामान्य जैविक प्रक्रिया है। 50 वर्ष के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण यह समस्या अधिक देखी जाती है। सिर्फ प्रोस्टेट का बड़ा होना बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन लक्षण दिखने पर जांच और इलाज जरूरी हो जाता है।
किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- पेशाब की धार कमजोर होना या रुक-रुक कर आना प्रमुख संकेत हैं।
- पेशाब के लिए जोर लगाना या मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास भी लक्षण है।
- रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना चिंता का विषय हो सकता है।
- अचानक तेज प्रेशर महसूस होना या पेशाब रोकने में दिक्कत भी संकेत है।
- पेशाब में जलन, दर्द या खून आना गंभीर लक्षण हैं।
- इनमें से कोई भी समस्या दिखे तो डॉक्टर से परामर्श लें।
पीएसए जांच और कैंसर से जुड़े भ्रम
डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि पीएसए का बढ़ा स्तर हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होता। कई बार कैंसर होने पर भी पीएसए सामान्य रह सकता है। पीएसए अंग-विशिष्ट मार्कर है, रोग-विशिष्ट नहीं। कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी जरूरी होती है। कुछ मामलों में केवल निगरानी पर्याप्त होती है। आक्रामक स्थिति में सर्जरी या रेडिएशन की जरूरत पड़ती है।
प्रोस्टेट कैंसर क्यों है खतरनाक
- विशेषज्ञों के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर अक्सर चुपचाप विकसित होता है।
- शुरुआती लक्षणों को लोग बढ़ती उम्र मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
- कमर, कूल्हों या पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द चेतावनी हो सकती है।
- बिना कारण वजन कम होना या अत्यधिक थकान भी संकेत है।
- यौन समस्याएं, इरेक्शन में दिक्कत या वीर्य में खून आना गंभीर लक्षण हैं।
- समय पर पहचान होने पर इसका इलाज संभव और प्रभावी है।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- 50 वर्ष की उम्र के बाद नियमित जांच कराना जरूरी है।
- परिवार में इतिहास हो तो समय से पहले स्क्रीनिंग कराएं।
- पेशाब या यौन स्वास्थ्य में आए बदलाव को मामूली न समझें।
- डायबिटीज या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी कारण बन सकती हैं।
- स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार से जोखिम कम किया जा सकता है।
- लक्षण दिखते ही शर्म छोड़कर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।
|
|