कैप्शन: RSS बाल सुधार गृह में बड़ा खुलासा (फाइल फोटो)
संवाद सहयोगी, जम्मू। आरएसपुरा के बाल सुधार गृह मामले की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां 26 बंदियों में से करीब 13 ऐसे पाए गए, जो कानूनी रूप से बालिग हो चुके हैं, लेकिन फिर भी उन्हें नाबालिग कैदियों के बीच रखा गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि 18 वर्ष की आयु पार करने के बाद बंदी की श्रेणी की समीक्षा कर उसे व्यस्क जेल या निर्धारित विशेष केंद्र में भेजा जाना चाहिए, तो ऐसे आरोपितों को अब तक यहां क्यों रखा गया था? बाल सुधार गृह में सोमवार को हिंसक घटना में शामिल तीनों आरोपित (दो पाकिस्तानी और एक स्थानीय) बालिग थे और गंभीर मामले होने के बावजूद वह छोटे-मोटे अपराधों में बंद किशोरों के साथ ही एक ही परिसर में उठते बैठते थे।
अपराध की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग रखा जाए
कानून और सुधार प्रणाली कहती है कि किशोरों को अपराध की गंभीरता और आयु के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाए, ताकि उनका पुनर्वास संभव हो सके। लेकिन यहां व्यस्क और जघन्य अपराधों में संलिप्त आरोपितों को भी नाबालिगों के बीच रखने से सुधार की अवधारणा पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।
सूत्रों के अनुसार, वहां तैनात कर्मियों ने पहले ही लिखित रूप से इस स्थिति की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी थी कि कई बंदी बालिग हो चुके हैं और उनका स्थानांतरण आवश्यक है।
चूक नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही
बावजूद इसके कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यदि यह तथ्य सही है, तो यह केवल एक चूक नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी। जम्मू के दोमाना क्षेत्र में गंभीर अपराध करने वाले किशोरों के लिए भी अलग से सेफ्टी सेंटर स्थापित किया जा चुका है। ऐसे में गंभीर तथ्य यह है कि चोरी या मामूली झगड़ों में बंद किशोरों को उन आरोपितों के साथ क्यों रखा गया था, जिनपर गोलीबारी, हत्या या अन्य जघन्य अपराधों के आरोप हैं। |