3-Hour Takedown Mandate: बीते दिनों भारत सरकार ने आईटी नियमों में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए। नए संशोधन के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट को सरकारी आदेश मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। अब Meta ने सरकार के नए आईटी नियमों में किए गए संशोधनों पर अपनी चिंता जाहिर की है। मेटा का कहना है कि इतने कम समय में आदेश का पालन करना \“ऑपरेशनल\“ तौर पर एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
\“3 घंटे का समय वास्तव में चुनौतीपूर्ण\“
मेटा के वाइस प्रेसिडेंट और डिप्टी चीफ प्राइवेसी ऑफिसर रॉब शर्मन ने एक मीडिया राउंडटेबल के दौरान कहा कि कंटेंट के वायरल होने की रफ्तार को रोकने के सरकार के इरादे को वे समझते हैं, लेकिन 3 घंटे का समय बहुत कम है। उन्होंने कहा, \“ऑपरेशनल तौर पर 3 घंटे का समय वास्तव में चुनौतीपूर्ण होने वाला है। यह केवल इस बारे में नहीं है कि कंपनियां नियमों का पालन करना चाहती हैं या नहीं, बल्कि इस बारे में है कि क्या आप इतने कम समय में सही फैसला ले सकते हैं।\“
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सरकार ने क्यों बदला नियम?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत कंटेंट हटाने की समय सीमा को 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया है। सरकार का तर्क है कि \“डीपफेक\“ और भ्रामक जानकारी बहुत तेजी से वायरल होती है, जिसे रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। पहले के नियमों में प्लेटफार्मों के पास विचार करने और कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त समय होता था, लेकिन अब यह समय बहुत कम हो गया है।
कंपनियों ने की स्पष्टता और लचीलेपन की मांग
मेटा के साथ-साथ अन्य टेक कंपनियां भी सरकार के सामने अपनी बात रखने की तैयारी कर रही है। उद्योग जगत के एक्सपर्ट्स का कहना है कि वे सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग करेंगे कि क्या तकनीकी रूप से जटिल मामलों या विदेशी कंटेंट से जुड़े मुद्दों में कुछ लचीलापन दिया जाएगा। रॉब शर्मन ने जोर दिया कि नियम ऐसे होने चाहिए जो \“काम करने योग्य\“ और \“ऑपरेशनल\“ हों, ताकि प्लेटफार्म नियमों का पालन करने के साथ-साथ यूजर्स के अधिकारों की भी रक्षा कर सकें।
मेटा ने यह भी इशारा किया कि \“सिंथेटिक रूप से जनरेटेड जानकारी\“ (SGI) के लिए जो शुरुआती ड्राफ्ट नियम आए थे, उनमें 3 घंटे की यह शर्त शामिल नहीं थी। कंपनियों का मानना है कि अचानक समय सीमा कम करने से उन पर दबाव बढ़ेगा, जिससे कभी-कभी जल्दबाजी में गलत फैसले भी लिए जा सकते है। अब देखना यह है कि क्या सरकार टेक दिग्गजों की इस चुनौती को देखते हुए नियमों में कोई ढील देती है या फिर सुरक्षा के मद्देनजर 3 घंटे की सख्ती बरकरार रखती है। |
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