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दिल्‍ली में झारखंड-ओडिशा की 600 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने सीखा तकनीक से तकदीर बदलने का हुनर

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नई दिल्‍ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्‍ट समिट 2026 में भाग लेतीं झारखंड और आ‍ेडिशा की ग्रामीण महिलाएं।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। तकनीक अब केवल महानगरों के कॉर्पोरेट दफ्तरों तक सीमित नहीं रही। झारखंड और ओडिशा के दूरदराज गांवों की महिलाएं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए अपनी और अपने समुदाय की तकदीर बदलने को तैयार हैं।    नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में टाटा स्टील और टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) के सहयोग से 600 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने हिस्सा लेकर डिजिटल इंडिया की एक नई तस्वीर पेश की। (India AI Impact Summit 2026)

एआई सखी इमर्शन: तकनीक अब बनी स्मार्ट साथी


एआई सखी इमर्शन नामक इस अनूठे कार्यक्रम में झारखंड की 311, ओडिशा की 315 और लुधियाना की 9 महिलाओं ने शिरकत की। ये वे महिलाएं हैं जो टीएसएफ के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे मानसी (स्वास्थ्य), दिशा (महिला नेतृत्व), संवाद और जोहार हाट (जनजातीय पहचान) से जुड़ी हैं। (IndiaAIImpactSummit 2026)

कार्यशाला के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने महिलाओं को एआई के व्यावहारिक उपयोग सिखाए:

  •     ऑनलाइन मार्केटिंग: अपने उत्पादों (हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद) के लिए नए बाजार खोजना।
  •     बेहतर डिजाइनिंग: एआई टूल्स की मदद से उत्पादों की डिजाइनिंग में सुधार करना।
  •     सरकारी योजनाएं: डिजिटल माध्यम से विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की तत्काल जानकारी प्राप्त करना।
  •     स्किल डेवलपमेंट: बिजनेस प्रमोशन और डॉक्यूमेंटेशन को एआई के जरिए आसान बनाना।


स्मृति ईरानी ने की सराहना, तसर सिल्क की शाल बनी आकर्षण
बतौर मुख्य अतिथि स्मृति ईरानी ने ग्रामीण महिलाओं के डिजिटल उत्साह की जमकर सराहना की। समिट में शामिल सभी 1600 महिलाओं ने तसर सिल्क की एक जैसी शाल ओढ़ी थी, जो सामूहिक पहचान और ग्रामीण शिल्प कौशल का प्रतीक बनी।    इन शालों को टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित नवजीवन ग्रुप की महिलाओं ने ही तैयार किया था। टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव राय ने कहा क‍ि एआई सखी कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व और आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।    इन महिलाओं की जिज्ञासा और नई तकनीक अपनाने की इच्छा ही जमीनी स्तर पर असली बदलाव लाएगी। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो ग्रामीण भारत की महिलाएं न केवल तकनीक को अपना सकती हैं, बल्कि इस क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व भी कर सकती हैं।
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