शास्त्री पार्क स्थित इंजीनियरिंग कालेज के पास सीवर का खुला ढक्कन। जागरण
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। देश की राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड की अनदेखी से दो लोगों की जान जा चुकी है। उसके बाद भी जल बोर्ड की नींद टूटने को तैयार नहीं है। गौतमपुरी में इंजीनियरिंग काॅलेज के पास सीवर के मैनहोल का ढक्कन टूटा पड़ा हुआ है। लोग हादसे का शिकार न हो जाए।
उन्हें सचेत करने के लिए स्थानीय लोगों ने पेड़ की टहनी उसमें लगाई हुई है। जरा सी नजर बचते ही कोई भी व्यक्ति इसमें गिरकर हादसे का शिकार हो सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिल्ली में दो बड़े हादसे होने के बाद भी सीवर व गड्ढों की स्थिति सुधर नहीं रही है।
गौतमपुरी में रहने वाले अमन ओझा ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से इंजीनियरिंग कालेज के पास पुरानी सीवर लाइन के मैनहोल का ढक्कन टूटा हुआ है। कालेज में काफी संख्या में विद्यार्थी पढ़ते हैं। जिस जगह सीवर का ढक्कन टूटा हुआ है, वह मुख्य सड़क पर है। काेई अगर उसमें गिरता है तो उसकी जान जा सकती है।
इसी तरह से ब्रह्मपुरी की कई गलियों में सीवर के ढक्कन टूटे हुए हैं। ब्रह्मपुरी गली नंबर-18 में पिछले एक सप्ताह से सीवर का गंदा पानी भरा हुआ है। यहां हालत बदतर हो गए हैं। सीवर की मुख्य लाइन ओवरफ्लो होने से लोगों के घरों के अंदर गंदा पानी भर गया है। घर का पानी सीवरलाइन में न जाकर घर में ही भर रहा है।
यहां के स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लेकर दिल्ली जल बोर्ड के कार्यालय में भटक रहे हैं, लेकिन कोई अधिकारी सुनने वाला नहीं है। लोगों की समस्याएं सुनने के बाद दैनिक जागरण के रिपोर्टर सीलमपुर स्थित दिल्ली जल बोर्ड के कार्यालय गए। जेई आशीष मुंद्रा किसी बैठक में गए हुए थे।
शिकायत दर्ज करवाने वाले कक्ष में बैठे जल बोर्ड कर्मचारी जगदीश प्रसाद से पूछा गया कि आखिर लोग शिकायतें कर रहे हैं तो सुनवाई क्यों नहीं हो रही है। वह चुप्पी साध गए। उसी दौरान एक शिकायतकर्ता ने कार्यालय में रखे रजिस्टर में अपनी शिकायत नंबर का फोटो क्लीक करने की कोशिश की तो कर्मचारी ने दुर्व्यवहार किया। कहा कि रजिस्टर में दर्ज शिकायत नंबर का फोटो नहीं ले सकते।
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