नई दिल्ली| भारत में निवेश की दुनिया तेजी से बदल रही है। दशकों तक निवेशक मशहूर फंड मैनेजर ढूंढने, शेयर चुनने या बाजार में समय-समय पर रणनीति बदलकर ज्यादा रिटर्न कमाने की कोशिश करते रहे। लेकिन अब फोकस बदल रहा है।
आज निवेशक आसान, पारदर्शी और कम लागत वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जो उन्हें भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ कहानी में सीधी भागीदारी दें। इस बदलाव के केंद्र में हैं- इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF)।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के अंत तक भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 80 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया।
यह पिछले साल के मुकाबले 19.9% की शानदार बढ़त है। सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में पैसिव फंड यानी इंडेक्स फंड और ETF रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा है इंडेक्स फंड का क्रेज?
1. कम लागत और ज्यादा फायदा
जैसे-जैसे बाजार परिपक्व हो रहा है, निवेशक समझ रहे हैं कि लंबे समय में कम खर्च रिटर्न पर बड़ा असर डालता है। इंडेक्स फंड और ETF का एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर एक्टिव फंड से काफी कम होता है, क्योंकि ये सिर्फ किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, उसे मात देने की कोशिश नहीं करते। यही कॉस्ट एडवांटेज समय के साथ कंपाउंड होकर बड़ा फायदा देता है।
AMFI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 के आखिर तक पैसिव फंड का AUM 14.20 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया, जो एक साल पहले 10.85 लाख करोड़ रुपए था। यानी करीब 31% की बढ़ोतरी।
2. पारदर्शिता और बढ़ा हुआ भरोसा
इंडेक्स आधारित फंड नियमों पर चलते हैं। निवेशक को साफ पता होता है कि उनका पैसा किन शेयरों में लगा है और बाजार गिरने या चढ़ने पर पोर्टफोलियो कैसे व्यवहार करेगा। इसमें \“सरप्राइज\“ कम होते हैं। आज कई निवेशक अनिश्चित \“अल्फा\“ के पीछे भागने के बजाय स्थिर और स्पष्ट रणनीति को तरजीह दे रहे हैं।
3. डिजिटल प्लेटफॉर्म का असर
स्मार्टफोन और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है। ETF को शेयर की तरह एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा जा सकता है और उनका रियल टाइम भाव दिखता है। युवा और पहली बार निवेश करने वाले लोग खास तौर पर इन विकल्पों को अपना रहे हैं।
4. रेगुलेटरी सपोर्ट और नए प्रोडक्ट
सेबी और AMFI ने पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा पर जोर दिया है। इससे पैसिव प्रोडक्ट्स में भरोसा बढ़ा है। अब सिर्फ निफ्टी या सेंसेक्स ट्रैकिंग फंड ही नहीं, बल्कि सेक्टर, थीमैटिक, गोल्ड ETF, सिल्वर ETF जैसे कई विकल्प मौजूद हैं।
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गोल्ड-सिल्वर ETF में भी बढ़ी दिलचस्पी
हाल के आंकड़ों में गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में मजबूत निवेश देखने को मिला है। यह दिखाता है कि निवेशक अब कमोडिटी में भी पैसिव तरीके से भागीदारी चाहते हैं।
क्यों बदल रही है निवेशकों की सोच?
अब इंडेक्स फंड और ETF को सिर्फ \“साइड ऑप्शन\“ नहीं माना जा रहा। ये पोर्टफोलियो का मुख्य आधार बन रहे हैं। कई निवेशक कोर पोर्टफोलियो पैसिव फंड में रखते हैं और सीमित हिस्से में एक्टिव रणनीति अपनाते हैं। यह निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता को दिखाता है।
आगे के लिए क्या हैं संकेत?
बढ़ता वित्तीय समावेश, पूंजी बाजार की गहराई और लंबी अवधि के निवेशकों की संख्या में इजाफा ये सभी संकेत देते हैं कि पैसिव निवेश का ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।
भारत में इंडेक्स फंड का उभार सिर्फ एक निवेश विकल्प का विस्तार नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है, जहां शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से हटकर अनुशासित, कम लागत और लंबी अवधि की कंपाउंडिंग को महत्व दिया जा रहा है।
(नोटः लेखक एंजेल वन एएमसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव हैं) |