चीन में 17 फरवरी से शुरू होगा स्प्रिंग फेस्टिवल (Picture Credit- AI Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक ओर जहां सारी दुनिया धूमधाम से नए साल का स्वागत कर चुके हैं, वहीं चीन में नए साल का जश्न शुरू होने वाला है। यहां 17 फरवरी को लूनार न्यू ईयर यानी चंद्र नव वर्ष का स्वागत किया जाएगा।
चीन की मान्यताओं के मुताबिक यह समय एक बड़े बदलाव का है। आइए आपको बताते हैं क्यों खास है चीन का यह नया साल और क्या होगा इसका प्रभाव-
बेहद खास है यह त्योहार
चीन में इस त्योहार को \“वसंत महोत्सव\“ यानी स्प्रिंग फेस्टिवल भी कहा जाता है। पूरे 15 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के आखिरी दिन बेहद खूबसूरत \“लालटेन महोत्सव\“ भी आयोजित किया जाता है। वहां के लोगों के लिए यह सिर्फ कैलेंडल में तारीख बदलने का दिन नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा बदलाव है।
यह एक ऐसा पवित्र मौका है जब लोग एक-दूसरे को दुआएं देते हैं और आने वाले साल के लिए नए संकल्प लेते हैं। साथ ही इसे अहम इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि अब \“सर्प वर्ष\“ यानी ईयर ऑफ द स्नेक (Year of the Snake) खत्म होकर \“अश्व वर्ष\“ यानी ईयर ऑफ द हॉर्स (Year of the Horse) की शुरुआत होगी।
क्या है ईयर ऑफ द हॉर्स?
चीन का कैलेंडर सूरज और चांद की चाल पर आधारित होता है, जिसे चंद्र-सौर कैलेंडर या लूनीसोलर कैलेंडर कहते हैं। इसी वजह से यहां हर साल नए साल की तारीख बदलती रहती है और यह आमतौर पर 21 जनवरी से 20 फरवरी के बीच आती है।
चीनी संस्कृति में हर साल को 12 जानवरों में से किसी एक के साथ जोड़ा जाता है। इनमें चूहा, बैल, बाघ, खरगोश, ड्रैगन, सांप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सुअर शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें 10 तत्वों (हवा, पानी, आग आदि) में से किसी एक को भी शामिल किया जाता है। हर 12 साल में एक बार ईयर ऑफ हॉर्स आता है।
इसी क्रम में इस बार का साल \“अग्नि अश्व\“ यानी फायर हॉर्स का है, जिसे चीनी भाषा में \“बिंग वू\“ कहा जाता है। अग्नि तत्व के साथ घोड़े का यह संयोग 60 साल में सिर्फ एक बार बनता है। इसमें \“आग\“ जोश और उर्जा का प्रतीक है, जबकि \“घोड़ा\“ आजादी और काम करने की शक्ति को दर्शाता है।
जश्न का होता है माहौल
चीन में नए साल काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान यहां मिलन का सबसे बड़ा उत्सव होता है। कामकाज के सिलसिले में जो लोग अपने परिवारों से दूर रहते हैं, वे इस दौरान घर आते हैं और परिवार के साथ मिलकर इसका जश्न मानते हैं।
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