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बिहार में नई चीनी मिल लागने से पहले गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाना चुनौती, सहकारी मॉडल से मिलेगी नई राह

deltin33 Yesterday 20:27 views 504
  

गन्ने की खेती। (जागरण)



रमण शुक्ला, पटना। बिहार में पहले 12 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती थी। हालांकि, एक-एक कर चीनी मिलों के बंद होने एवं गन्ना मूल्य भुगतान में हीलाहवाली के कारण किसानों का गन्ने की खेती से धीरे-धीरे मोह भंग होता गया।

वर्तमान में 2.31 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हो रही है, जिनसे जैसे-तैसे 10 मिलों का संचालन हो रहा है। पिछले कई वर्षों से सरकार गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने का प्रयास कर रही है, पर परिणाम लक्ष्य के अनुकूल नहीं मिल रहा है।

इसका मूल कारण गन्ना मूल्य का समुचित एवं समय पर भुगतान नहीं होना है। वहीं, अभी 66 हजार एकड़ खेत जल जमाव से बेकार पड़े हैं। उनसे जल निकासी की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
सहकारिता मॉडल बनेगा आधार

सरकार का प्रयास अब अगले पेराई सत्र से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश (यूपी) एवं गुजरात की तर्ज पर बिहार में सहकारी माडल को बढ़ावा देने की है। इसी लक्ष्य को मध्य में रखकर सकरी (मधुबनी) एवं रैयाम (दरभंगा ) में बंद चीनी मिल चलाने का दायित्व सहकारिता विभाग को दिया गया है।

विदित हो कि वर्तमान में महाराष्ट्र में सौ से अधिक चीनी मिल, यूपी में 20 एवं गुजरात में 19 चीनी मिल सहकारिता माडल पर सफलता पूर्वक संचालित हैं।

राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) एवं इंडियन पोटाश लिमिटेड के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गन्ना उद्योग विभाग एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने सहकारी माडल के माध्यम गन्ना किसानों और उद्यमियों के हित में नई चीनी मिलें स्थापित करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
चीनी मिल लगाने पर सरकार दे रही अनुदान

सरकार चीनी मिल लगाने पर औद्योगिक नीति-2014 के तहत न्यूनतमम 2500 टीसीडी या 1500 टीसीडी के लिए अचल पूंजी निवेश पर 20 प्रतिशत अनुदान या 15 करोड़ रुपये की राशि दोनों में से जो कम हो दे रही है।
दस जिलों में हो रही बंपर खेती

वर्तमान में बिहार के दस जिलों में गन्ने की बंपर खेती हो रही है। इसमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, सीमामढ़ी, शिवहर एवं मुजफ्फरपुर जिले प्रमुख है।

इसके अतिरिक्त अन्य जिलों में गुड़ उत्पादन एवं गन्ने के ज्यूस के लिए भी खेती धीरे-धीरे बढ़ रही है। हालांकि किसानों के बीच धान एवं गेहूं के अतिरिक्त मक्के की खेती पर अधिक निर्भरता सरकारी प्रयास पर भारी पड़ रही है।
यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान

किसानों को यंत्र खरीदने के लिए सरकार गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत 50 प्रतिशत अनुदान रही है। सरकार गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के गन्ना किसानों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान देने का प्रविधान है।

वहीं, चीनी मिल क्षेत्र में गन्ना यंत्र बैंक स्थापित करने के लिए चीनी मिल, पैक्स, जीविका, एफपीओ, कृषक समूह को चीनी यंत्रों की समूह मूल्य का 70 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान है।

यह भी पढ़ें- बिहार में फिर से गुलजार होंगी चीनी मिलें, 66 हजार एकड़ जल जमाव वाली जमीन पर होगी गन्ने की खेती
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