16 गांवों की आस्था से जुड़ा है ऊखीमठ ब्लाक के त्यूंग गांव में स्थित यह मंदिर। जागरण
रविन्द्र कप्रवान, रुद्रप्रयाग। हिमालय की मनोरम वादियों के बीच स्थित तुंगनाथ घाटी का तुंगेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां साधकों को दर्शन दिए थे, इसलिए महाशिवरात्रि पर्व पर प्रतिवर्ष क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर स्वयंभू शिवलिंग का जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक करते हैं।
ऊखीमठ ब्लाक की परकंडी ग्राम पंचायत के त्यूंग गांव में स्थित यह मंदिर चारों ओर से हरे-भरे बुग्याल और हिमाच्छादित चोटियों से घिरा हुआ है। क्षेत्र के लगभग 16 गांवों की आस्था से जुड़ा तुंगेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग आदि शंकराचार्य के कालखंड से पूर्व का माना जाता है़।
आज भी यहां खोदाई में छोटी-छोटी बावड़ियां और मंदिर से जुड़े अवशेष मिलते हैं। कहते हैं कि पीढ़ियों पहले यहां पर एक दक्षिण भारतीय संत रहते थे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद 1008 स्वामी पूर्णा गिरि व 1008 स्वामी गोविंद गिरि ने मंदिर की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में 108 महंत स्वामी भवानंद यहां भगवान भोलेनाथ की सेवा कर रहे हैं।
वर्ष 2004 में पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार व विस्तारीकरण कर यहां भगवान शिव का भव्य मंदिर बनाया गया। दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह में माता पार्वती, गणेश व पंचमुखी हनुमान की मूर्ति विराजमान हैं। सभामंडप के केंद्र में मां दुर्गा, हनुमान व नंदी, पश्चिम में भगवान कच्छप, उत्तर में दत्तात्रेय, पूर्व में सूर्य भगवान व दक्षिण में भगवान विष्णु का विग्र स्थापित है। मंदिर के बाहर उत्तर में कुबेर, दक्षिण में यमराज, पश्चिम में वरुणदेव व पूर्व में इंद्रदेव विराजमान हैं।
इसी तरह धारे में शनि महाराज, मंदिर के सामने आदि शंकराचार्य, शंकराचार्य के पार्श्व में ध्यानावस्थित हनुमान व मंदिर के मुख्य मार्ग में भैरव की मूर्ति हैं। मुख्य द्वार पर शिव परिवार, यक्ष, गंधर्व, नारद, नटराज, द्वारपाल व गणेश स्थापित हैं। तुंगेश्वर महादेव मंदिर त्यूंग के महंत 108 स्वामी भवानंद पुरी बताते हैं कि सावन और माघ समेत अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित होते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का मौका खास होता है। इस मौके पर यहां दूरदराज से भक्त जुटते हैं।
ऐसे पहुंचें
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर लगभग 30 किमी और भीरी-परकंडी लिंक मोटर मार्ग पर करीब 3.5 किमी का सफर तय करने के बाद त्यूंग गांव पहुंचा जाता है। यहां सड़क से लगभग 100 मीटर की पैदल दूरी पर भगवान तुंगेश्वर के दर्शन होते हैं।
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