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पुलवामा हमले के 7 साल: फोन ने सुलझाई गुत्थी, NIA को मिले थे 100 वीडियो और फोटो; 14 को नहीं 5 फरवरी को करना था हमला

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पुलवामा हमले के 7 साल। फाइल फोटो



नवीन नवाज, श्रीनगर। 14 फरवरी 2019 को बीते सात वर्ष हाे रहे हैं और उस दिन कश्मीर में केसर की क्यारियों के साथ सटे लेथपोरा में जैश-ए-मोहम्मद ने कश्मीर जिहाद को गति देने के लिए सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला किया। हमले में 40 सीआरपीएफ कर्मी वीरगति को प्राप्त हुए।

लेथपोरा ने पूरे देश को जगाया जिसने राजनीतिक नेतृत्व को कहा कि बस अब बहुत हो गया। अब इस्लाम के नाम पर जारी इस रक्तरंंजित जिहादी को रोकना नहीं, बल्कि हमेशा के लिए इसके ताबूत में कील ठोकना है। चंद दिनों में ऑपरेशन बंदर हुआ भारतीय वायुसेना ने 1971 के बाद पहली बार दुश्मन के इलाके में आतंकी शिविरों को नष्ट किया।

नया भारत देख सभी हैरान थे। जो सोचते थे कि बस यही है, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर देखा और दिल्ली में लाल किले पर सब्ज परचम लहराने का दम भरने वालों को रोते देखा। पुलवामा हमले के बाद जम्मू कश्मीर में बदलाव का एक नया दौर शुरू हुआ और बीते सात वर्ष में केसर की खुशबू और ट्यूलिप की खूबसूरती से सराेबार हो रहा है।
गुनाहगार अब खुद को बचाने के लिए छिपते फिर रहे

पुलवामा हमले के बचे खुचे गुनाहगार अब खुद को बचाने के लिए छिपते फिर रहे हैं। लेकिन यह इतना आसान नहीं था, जितना अब नजर आता है। हालांकि जैश ए मोहम्मद ने हमले के तुरंत बाद जिम्मेदारी ली थी, आत्मघाती हमलावर भी चिह्नित हो गया था और कश्मीर में इस हमले में मुख्य भूमिका निभाने वाले प्रमुख आतंकी कमांडर भी मारे जा रहे थे, लेकिन षडयंत्र की गुत्थी नहीं सुलझ रही थी।

यह समझ में नहीं आ रहा था कि हमले का षडयंत्र कब और कैसे रचा गया। विस्फोटक कहां से आया और जैश ए मोहम्मद के सरगना हमले के समय क्या कर रहे थे। इस दौरान मार्च 2019 में सुरक्षाबलों ने पुलवामा में एक भीषण मुठभेड़ में जैश ए मोहम्मद के आतंकी उमर फारूक उर्फ इदरीस भाई को उसके एक अन्य स्थानीय साथी संग मार गिराया।
सैमसंग का फोन हुआ था बरामद

उमर फारूक जेश सरगना मौलाना मसूद अजहर का भतीजा था जो वर्ष 2017 के अंत में या फिर 2018 की शुरुआत में सांबा सेक्टर के रास्ते घुसपैठ कर कश्मीर पहुंचा था। उमर फारूक के सामान की तलाशी के दौरान उसका पाकिस्तानी पहचान पत्र, एक सैमसंग एस-9 गैलेक्सी फ़ोन था, जो डबल एन्क्रिप्शन वाला एक हाई-एंड मॉडल था, मिला था।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने फोन को डिकोड करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन विफल रही और उसके बाद फोन को नौगाम पुलिस स्टेशन के मालखाना में जमा कर दिया गया। यह वही नौगाम पुलिस स्टेशन है जहां गत नवंबर को फरीदाबाद से बरामद कर लाए गए विस्फोटकों की जांच के दौरान धमाका हुआ था।
फोन ने सुलझाई गुत्थी

पुलवामा हमले की जांच कर रही एनआइए परेशान थी कि उसके हाथ ऐसा कोई सुराग नहीं लग रहा जिसके आधार पर वह इस पूरे षडयंत्र से पर्दा उठा सके। मामले की जांच संभाल रहे एनआइए के तत्कालीन एसएसपी राकेश भलवाल जो इन दिनों मणिपुर में डीआईजी हैं, को पता चला कि अजहर मसूद के भतीजे का फोन मालखाने में पड़ा है।

फोन लगभग नष्ट हो चुका है। उन्होंने संबधित अधिकारियों से कहा कि प्रयास करने में क्या बुराई है, फोन को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) को भेज दिया गया। सीईआरटी-इन ने फोन का डेटा निकाल लिया।

एनआइए को फोन से 100 वीडियो और फ़ोटो मिले, जिन्हें उमर फारूक के चाचा मौलाना मोहम्मद अम्मार को वाट्सऐप के ज़रिए भेजे जाने के बाद डिलीट कर दिया गया था। फोन से प्राप्त किए गए डेटा से ही पता चला था कि हमले का षडयंत्र तैयार किए जाने से लेकर हमले को अंजाम दिए जाने के बाद तक जैश आतंकी पाकिस्तान में बैठे अजहर मसूर, अम्मार अली और रउफ असगर के साथ लगातार संपर्क में था।
आतंकियों की ट्रेनिंग और कैंपों की जानकारी मिली

फोन से मिली तस्वीरों से आतंकियों की ट्रेनिंग और उनके कैंपों की जानकारी भी मिली। हमले में शामिल उमर फारूक और इस्माइल दोनों अफगानिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के अलावा नाटो सेना के खिलाफ लड़ चुके थे।

मालखाने में बेकार पड़ा फोन एनआइए के लिए खजाना साबित हुआ और फिर इस षडयंत्र की परत दर परत खुलती गई। जैश ए माेहम्मद ने दो आत्मघाती आतंकी आदिल डार और काकपोरा पुलवामा के रहने वाले शाकिर बशीर मागरे को तैयार किया था।

आदिल डार पुलवामा के गुंडीपोरा का रहने वाला था। शाकिर मागरे को पुलवामा हमले के बाद दूसरा आत्मघाती हमला करना था, जो बालाकोट स्ट्राइक के कारण जैश ए मोहम्मद ने टाल दिया था। शाकिर मागरे का हैंडरल कारी यासिर था।
इंशा जान नामक युवती का था अहम रोल

उमर फारूक के मोबाइल फोन से इंशा जान नामक एक युवती की तस्वीर मिली थी। एनआइए ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में वह पहले तो मुकर गई लेकिन जब उसे उसकी आतंकी संग तस्वीर दिखाई गई तो उसने कई राज उगले। उसके पिता को भी गिरफ्तार कर लिया।

वह सिर्फ उमर फारूक की महबूबा ही नहीं थी बल्कि पुलवामा हमले के षडयंत्रकारियों में अहम भूमिका निभाने वाली एक महिला ओवरग्राउंड वर्कर थी। उसका बाप भी जेश ए मोहममद का ओवरग्राउंड वर्कर था और आतंकी उनके घर में अक्सर ठहरते थे।

इंशा जान ने पूछताछ में बताया कि आदिल का वीडियो कब और कैसे शूट किया गया है। फोन और इंशा जान व उसके पिता तारिक से पूछताछ के आधार पर शाकिर अहमद मागरे पकड़ा गया। फोन से मिले अन्य सुरागों के आधार पर अन्य षडयंत्रकारी पकड़े गए।
आईईईडी से लैस थी कार

उनकी तस्वीरें, हमले मं लिप्त आतकियों के सामूहिक फोटोग्राफ, ईको कार को आईइडी से लैस करते हुए, आदिल का वीडियो तैयार करते हुए, तस्वीरें मिली। शाकिर मागरे आदिल काे लेकर पहुंचा था हाइवे पर शाकिर मागरे 14 फरवरी के हमले में इस्तेमाल की गई कार चलाई थी, लेकिन हमले की जगह से करीब 500 मीटर पहले गाड़ी से उतर गया था।

उसकी भूमिका में एक ई-कॉमर्स वेब पोर्टल के ज़रिए आइईडी को असेंबल करने के लिए इस्तेमाल किए गए ग्लव्स, बैटरी और अमोनियम पाउडर खरीदना शामिल था। जिस जगह हमला किया था,वहां से कुछ ही दूरी पर शाकिर की दुकान थी, जहां से वह सुरक्षाबलों के काफिलों की निगरानी करता था।

षडयंत्र में शामिल मुदासिर अहमद खान ने जिलेटिन की छड़ों का इंतज़ाम किया था औरउसने वह शाकिर को दी थी। शाकिर ने सारा विस्फोटक अपने घर में जमा किया था।
आदिल का वीडियो वाट्सऐप के जरिए भेजा था सीमा पार

आत्मघाती आतंक आदिल डार का हमले के बाद वायरल हुआ, वीडियो हमले से लगभग तीन चार दिन पहले शूट किया गया था। आदिल डार ठीक से नहीं बोल पा रहा था।इसलिए आदिल डार सिर्फ होंठ हिला रहा था जबकि पीछे से समीर डार बोल रहा था। वीडियो तैयार करने के बाद इसे वाट्सएप के जरिए पाकिस्तान में अम्मार के पास भेजा गया था पाकिस्तान में इस वीडियो की एडिटिंग हुई और हमले के बाद इसे जारी किया गया था।
वर्ष 2018 में रचा गया था षडयंत्र

उमर फारूक के फोन और उसके आधार पर पकड़े गए स्थानीय षडयंत्रकारियों से पूछताछ में पता चला कि हमले की तैयारी वर्ष 2018 के अक्टूबर में शुरू हो चुकी थी। जनवरी 2019 में आतंकी सज्जाद अहमद बट ने मारुती ईको कार खरीदी। कार को कुछ दिनों के लिए शाकिर बशीर के घर मे रखा गया था।

इसके साथ ही छन्नपोरा श्रीनगर के रहने वाले एक छात्र वैजुल इस्लाम ने अमेजन अकाउंट से आनलाइन चार किलोग्राम एल्युमिनियम पाउडर मंगवाया और अपने हैंडल जैश कमांडर मोहम्मद इस्माइल उर्फ सैफुल्ला को सौंपा था। फरवरी के पहले सप्ताह में उमर फारूक, समीर अहमद डार, आदिल अहमद डार और शाकिर बशीर ने आइईडी तैयार कर उसके ईको कार में फिट किया था।
14 को नहीं पांच फरवरी को करना था हमला

जैश ए मोहम्मद ने हमले के लिए पांच फरवरी का दिन तय किया था। क्योंकि पांच फरवरी को कश्मीर की आजादी के समथ्रन में पाकिस्तान में कश्मीर सालिडेरिटी डे मनाया जाता है। लेकिन पांच फरवरी को हिमपात के चलते राजमार्ग बंद था और हमला टाल दिया गया।

पुलवामा हमले के गुनाहगारों में से चार मौलाना मसूद अजहर,उसका भाई रऊफ असगर और अम्मार अल्वी के अलावा कश्मीरी आतंकी आशिक अहमद नेंगरु फरार हैं। यह सभी पाकिस्तान में ही हैं। हमले का षडयंत्र रचने, विस्फोटक तैयार करने और हमला करने में लिप्त रहे आतंकी आतंकी मारे जा चुके हैं।

इनमें आत्मघाती आदिल अहमद डार,समीर डार, मुदस्सर खान और सज्जाद अहमद बट कश्मीर के ही रहने वाले थे जबकि चार अन्य मारे गए आतंकी मोहम्मद इस्माइल,मुहम्मद उमर फारूक और

मोहम्मद कामरान अली पाकिस्तानी थे। इनमें उमर फारूक और माेहम्म इस्माइल उर्फ लंबू दोनों ही जैश कमांडर अजहर मसूद के करीबी रिश्तेदार थे। जेल में बंद पुलवामा के गुनाहगारों में शाकिर बशीर, इंशा जान, पीर तारिक अहमद शाह, वैज-उल-इस्लाम, मोहम्मद अब्बास राथर, बिलाल अहमद कुचे और मोहम्मद इकबाल राथर शामिल हैं।
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