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ट्रिब्यूनल ने रेरा के आदेश को ठहराया सही, बिल्डर के फरार होने के बाद अब पीएनबी दिलाएगा खरीदारों को फ्लैट

deltin33 6 hour(s) ago views 336
  

हल्द्वानी में बिल्डर के फरार हो जाने के बाद परियोजना/संपत्ति की नीलामी की पीएनबी को दी थी सशर्त अनुमति। प्रतीकात्मक



जागरण संवाददाता, देहरादून। क्या बैंकों का काम सिर्फ अपने ऋण और उसकी सुरक्षा तक ही सीमित है। क्या बैंकों की कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है। इन सवालों के बीच जब पंजाब नेशनल बैंक ने बिल्डर के फरार हो जाने बाद संपत्ति की नीलामी की अनुमति प्राप्त की तो अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से मुकर गया।

खरीदारों को फ्लैट दिलाने की रेरा की सशर्त अनुमति के विरुद्ध बैंक रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल चला गया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस सामाजिक जिम्मेदारी को आगे रखा और रेरा के आदेश को सही पाते हुए बैंक की याचिका रद्द कर दी।

हल्द्वानी में बिल्डर धनंजय गिरि भी पुष्पांजलि इंफ्राटेक के दीपक मित्तल और आर्केडिया हिलाक्स के शाश्वत गर्ग की तरह ग्रुप हाउसिंग परियोजना को अधूरा छोड़कर बैंक और फ्लैट खरीदारों की 12 करोड़ से अधिक की रकम डकार कर फरार हो गया था।

हल्द्वानी में बिल्डर धनंजय गिरि से फरार होने से पहले पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से करीब 11 करोड़ रुपये का ऋण लिया, जबकि 06 फ्लैट खरीदारों (कुल आठ फ्लैट) की रकम भी हड़प ली।
समूह आवासीय परियोजना

बिल्डर धनंजय गिरि ने हल्द्वानी के दमुवाडुंगा में को समूह आवासीय परियोजना शुरू की थी, उसकी जमीन पंजाब नेशनल बैंक की हल्द्वानी शाखा में बंधक बनाकर ऋण लिया था। जिसका कुल बकाया 10.74 करोड़ रुपये है। इसी के साथ बिल्डर ने फ्लैट की बुकिंग भी शुरू की। आठ फ्लैट की बुकिंग की गई, मगर परियोजना का निर्माण शुरू ही नहीं किया गया। वहीं, बैंक की बकाया राशि का भुगतान न किए जाने पर सरफेसी एक्ट के तहत परियोजना की बंधक जमीन की नीलामी की तैयारी शुरू कर दी गई थी।

खुद को लूटा-पिटा देख चार फ्लैट की बुकिंग कराने वाले दो खरीदार रेरा पहुंचे। उन्होंने बिल्डर के साथ ही बैंक को भी पार्टी बनाया। तब रेरा अध्यक्ष अमिताभ मैत्रा ने नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अंतिम सुनाई में तमाम तथ्यों पर गौर करते हुए यह रोक हटा दी गई। रेरा ने पाया कि बिल्डर की धोखाधड़ी के विरुद्ध विभिन्न एफआइआर दर्ज की गई है और उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया है।

पुलिस की रिपोर्ट में बिल्डर को फरार दर्ज किया गया है। यह तथ्य भी सामने आया कि बिल्डर को अब तक नौ आदेश दिए जा चुके हैं, जिनमें से किसी का भी पालन नहीं किया गया। चूंकि, बैंक में जमीन को बंधक बनाने से पहले ही बिल्डर फ्लैट की बिक्री कर चुका था, लिहाजा उनके हितों की रक्षा अनिवार्य रूप से की जानी है।

रेरा ने कहा था, भूमि की नीलामी में बैंक आ जाता है प्रमोटर की भूमिका में
रेरा ने पाया कि बंधक बनाई गई जमीन की कीमत 11.91 करोड़ रुपये है, जबकि बैंक का बकाया 10.74 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही फ्लैट खरीदारों की देनदारी भी है। रेरा सदस्य मैत्रा ने राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा था कि जब बैंक गिरवी भूमि की नीलामी करता है तो वह प्रमोटर की स्थिति में आ जाता है। ऐसे में खरीदारों के हितों की रक्षा करना उसका दायित्व है।

पीएनबी को दी थी सशर्त नीलामी की अनुमति, करना होगा पालन
रेरा ने बंधक जमीन की नीलामी से रोक हटाते हुए इसकी अनुमति पीएनबी को दे दी। साथ ही स्पष्ट किया कि नीलामी के विज्ञापन में साफ करना होगा कि बिल्डर ने छह खरीदारों के साथ आठ फ्लैट का समझौता किया है। जिनमें पांच प्रकरण रेरा में दर्ज हैं। लिहाजा, सफल बोलीदाता को बाध्य किया जाएगा कि वह परियोजना समय पर पूरी करे और सभी खरीदारों को फ्लैट सौंपे। लेकिन, पीएनबी ने इस आदेश के विरोध में रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर दी थी। अब ट्रिब्यूनल ने भी साफ कर दिया है कि बैंक को खरीदारों को फ्लैट दिलाने होंगे।

इन शर्तों के साथ फ्लैट देने की थी शर्त, विलंब पर ब्याज की भी व्यवस्था
फ्लैट खरीदारों को उनके समझौते की शर्तों के अनुसार 36 माह के भीतर फ्लैट देने होंगे। नीलामी में यदि अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होती है तो उसे बिल्डर को लौटाने की जगह शिकायतकर्ताओं को 10.9 प्रतिशत ब्याज की दर से विलंब ब्याज के रूप में चुकाया जाएगा। नया डेवलपर यदि 36 माह में फ्लैट नहीं देता है तो उस पर भी विलंब ब्याज लागू होगा।

इन्होंने खरीदे फ्लैट, अब राहत की उम्मीद

  • हरीश चंद्र पांडे (अप्रैल 2017)
  • पाइन ट्री वेंचर (जतिन मिनोचा) (मई 2018)
  • डा जीएल फिर्मल (नवंबर 2017)
  • बीएल फिर्मल (अक्टूबर 2017)
  • जुगल किशोर तिवारी (अक्टूबर 2017)
  • गुरमीत सिंह (नवंबर 2019)
  • गुरमीत सिंह (नवंबर 2019)
  • गुरमीत सिंह (नवंबर 2019)


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