गांधीबाग टैंक चौराहे के पास सड़क का ये हाल----जागरण
जागरण संवाददाता, मेरठ। बेगमपुल के जीरो माइल चौराहा से माल रोड के टैंक चौराहा तक का सफर वाहन चालकों के लिए मुसीबतों का सबब बन गया है। सड़क का यह हिस्सा गहरे गड्ढों से भरा है। कई स्थानों पर पूरी सड़क टूट चुकी है।
बेगमपुल की ओर से तेज गति से आते दो पहिया और चार पहिया वाहन अचानक गहरे गड्ढे सामने आने पर न संभल पाते हैं और न ही रुक पाते हैं। सीधे गड्ढे में गिरकर क्षतिग्रस्त होते हैं और वाहन में सवार लोग घायल हो जाते हैं। सड़क की यह हालत लंबे समय से बनी है। जिससे संबंधित अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
बेगमपुल पर एनसीआरटीसी ने भूमिगत रेलवे स्टेशन का काम पूरा करके उपर से सड़क बना दी है। अब यहां सड़क काफी चौड़ी हो गई है। लिहाजा शहर के जाम से जूझकर निकलने वाले वाहनों की गति यहां तेज हो जाती है। लेकिन बेगलपुल के जीरो माइल चौराहा से निकलते ही तेज गति से चल रहे वाहन सीधे गहरे गड्डों में जाकर गिरते हैं। यहां सड़क की हालत बेहद खराब है।
जीरो माइल के पास ही पूरी सड़क टूटकर गहरे गड्ढे में बदल चुकी है। चिराग जूनियर स्कूल चौराहा से होते हुए माल रोड के टैंक चौराहा और उससे आगे एमईएस बिजलीघर तक सड़क गड्ढों से भरी है। टैंक चौराहा और गांधी बाग के पास शामली करनाल हाईवे के मोड़ पर सड़क पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है।
चार पहिया और दो पहिया वाहन इन गड्ढों और टूटी सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। रात में भारी वाहनों और मालवाहक ट्रकों की नो एंट्री समाप्त होने के बाद यहां हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। भारी वाहनों की लंबी लाइन के बीच कार और दो पहिया वाहनों का निकल पाना दूभर हो जाता है।
सावन की कांवड़ यात्रा की बेरिकेडिंग के गड्ढे तक नहीं भरे
रैपिड रेल प्रोजेक्ट की निर्माणकर्ता एजेंसी एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन कारपोरेशन) ने सोफीपुर से एमईएस बिजलीघर तक सड़क निर्माण किया है और उससे आगे सड़क को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। माल रोड के टैंक चौराहा से बेगमपुल तक सड़क की चौड़ाई कम है।
लिहाजा यहां डिवाईडर नहीं बना है। सावन शिवरात्रि में कांवड़ यात्रियों के लिए यहां सड़क के बीचोबीच बल्लियां गाड़कर बेरिकेडिंग बनाई गई थी। इस बेरिकेडिंग के गड्ढों को सात महीने बाद भी किसी ने नहीं भरा है। परेशान लोगों का कहना है कि लगता है कि इस सड़क का कोई विभाग मालिक ही नहीं है।
रोशनी और अंधेरे के खेल में गई युवक की जान
रुड़की रोड का एनसीआरटीसी ने चौड़ीकरण किया है। स्ट्रीट लाइटों को डिवाईडर से हटाकर सड़क के दोनों ओर लगाया गया है लेकिन ये स्ट्रीट लाइटें अपनी मर्जी से जलती है। किसी दिन जलती हैं तो लंबे समय तक बंद हो जाती हैं।
पिछले दिनों तेंदुआ की मौजूदगी की सूचना पर यहां स्ट्रीट लाइटें कई दिन तक लगातार रोशन रहीं लेकिन अब फिर से उनका मनमाना व्यवहार जारी है। इसी अंधेरे और रोशनी के खेल में मंगलवार देर रात सड़क पार कर रहे अज्ञात युवक की जान चली गई। पहले उसे वाहन ने टक्कर मारी और उसके बाद अंधेरा होने के कारण उसे कोई देख नहीं पाया। |
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