प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, कानपुर। फरवरी का महीना आमतौर पर ठंड की विदाई और मौसम के बदलाव के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार बदलाव बिजली बिल में दिखा। शहर के करीब साढ़े सात लाख उपभोक्ताओं को जब बिल थमाया गया तो कई घरों में पहला सवाल यही उठा, इतना ज्यादा कैसे?
कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी लिमिटेड (केस्को) ने बिलों में एक से दस प्रतिशत तक फ्यूल सरचार्ज जोड़कर वसूली शुरू कर दी है। यानी बिजली उत्पादन में बढ़ी ईंधन लागत का बोझ अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। लेकिन बिना पूर्व सूचना अचानक बढ़े बिलों ने लोगों को चौंका दिया।
मामला यहीं नहीं रुका। बढ़े हुए बिलों की चर्चा जब तेज हुई तो उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भी सख्त रुख अपना लिया। आयोग ने पावर कारपोरेशन से सात दिन में जवाब तलब करते हुए पूछा है कि 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की गणना किस आधार पर की गई और क्या यह स्वीकृत दरों के अनुरूप है।
फ्यूल सरचार्ज दरअसल वह अतिरिक्त शुल्क है, जो कोयला या गैस की कीमत बढ़ने पर वसूला जाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कोयले की कीमतों और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव होता है तो उत्पादन लागत बढ़ने लगती है। जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है। फरवरी माह के बिल में फ्यूल सरचार्ज जुड़ने से मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे कारोबारियों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच बिजली बिल का यह झटका घरेलू बजट बिगाड़ रहा है।
अब निगाहें आयोग की कार्रवाई पर टिक गईं हैं। वहीं इस मामले में केस्को के वाणिज्य निदेशक राकेश वार्ष्णेय से फ्यूल सरचार्ज वसूली को लेकर पक्ष जानने के लिए गुरूवार शाम को सीयूजी नंबर पर तीन बार काल करके बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
हर महीने करीब चार से पांच हजार रुपये बिल आता था, लेकिन इस बार फरवरी का बिल लगभग 800 रुपये ज्यादा आया है। पहले लगा मीटर में गड़बड़ी होगी, लेकिन जब बिल देखा तो फ्यूल सरचार्ज अलग से जुड़ा था। हमें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई। महंगाई पहले ही कम नहीं है, ऊपर से बिजली का बोझ बढ़ गया। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए हर अतिरिक्त खर्च मायने रखता है।
नवीन बाजपेई, उपभोक्ता |
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