भूमि अधिग्रहण को लेकर हुआ विवाद। (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर-गोराडीह मार्ग में बन रहे बौंसी रेलवे पुल संख्या-2 पर बन रहे रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण को लेकर गुरुवार को विवाद खड़ा हो गया है।
जमीन अधिग्रहण से जुड़े गजट के प्रकाशन के बाद प्रभावित क्षेत्र के लोगों में असंतोष बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया। लोगों के विरोध के कारण बिजली पोल शिफ्टिंग का काम छोड़कर कर्मियों को भागना पड़ा। काम प्रभावित हो गया। लोगों का आरोप है कि सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं की जा रही।
स्थानीय निवासी राकेश कुमार का आरोप है कि गुरुवार को दिनभर इंतजार के बावजूद सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए कोई अधिकारी या टीम क्षेत्र में नहीं पहुंची। इस संबंध में जानकारी लेने जब लोग भू-अर्जन कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि पूर्व में कराए गए एसआईए को ही मान्य माना जाएगा।
राकेश कुमार सहित अन्य लोगों का कहना है कि बिना नए सिरे से जमीनी स्थिति देखे पुराने आकलन के आधार पर आगे बढ़ना प्रभावित परिवारों के साथ न्याय नहीं है। लोगों को आशंका है कि उनकी वास्तविक स्थिति और नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाएगा।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही निजी जमीन पर बिजली के पोल लगाने का प्रयास किया गया। जब एजेंसी के लोग पोल गाड़ने पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने विरोध जताया।
आक्रोश बढ़ता देख एजेंसी के कर्मियों को वहां से भागना पड़ा। लोगों का कहना है कि जब तक सब कुछ तय नहीं हो जाता तब तक निर्माण या स्थाई ढांचा खड़ा करना उचित नहीं है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि सड़क किनारे बसे कई लोग खतियानी रैयत नहीं, बल्कि खरीदकर जमीन लेने वाले हैं। किसी ने आधा कट्टा तो किसी ने एक कट्टा जमीन में घर बनाया है।
भूमि अधिग्रहण होने पर हो जाएंगे बेघर
यह जमीन उनके लिए बेहद कीमती है और अधिग्रहण होने पर वे बेघर हो जाएंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार कई परिवारों ने छोटा सा घर बनाने के लिए गांव की कई बीघा पुश्तैनी जमीन तक बेच दी थी।
अब वहीं आशियाना छिनने का खतरा सामने है। इसी मुद्दे पर सामाजिक स्तर पर बैठक कर लोगों ने आरओबी के बजाय अंडरपास (आरयूबी) बनाने की मांग उठाई है। ताकि कम से कम विस्थापन हो सके।
लोगों ने कहा कि इस संबंध में लिखित शिकायत मुख्यमंत्री, पुल निर्माण निगम के चेयरमैन, भू-अर्जन पदाधिकारी, जिलाधिकारी, एसआईए निदेशक और मानवाधिकार आयोग तक भेजी गई है। वे चाहते हैं कि उनकी आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि विकास कार्य और जनहित के बीच संतुलन बनाया जा सके।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कई लोगों ने सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर किसी ने घर बना लिया है, घर का छज्जा सड़क पर निकाला हुआ है। सड़क की घेराबंदी कर आगे बागीचा बना लिया है। आरओबी निर्माण के लिए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई होगी। जरूरत के हिसाब से निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। |
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