राज चौहान का फाइल फोटो और उसके समर्थकों द्वारा बनाया गया फेसबुक पेज।
जागरण संवाददाता, आगरा। राज चौहान हत्याकांड में इंटरनेट मीडिया पर बदले की चिंगारी सुलग रही है। स्वजन हत्या के पीछे आज भी पुराने हिस्ट्रीशीटर का हाथ होने का दावा करते हुए उसे ही हत्या का दोषी ठहरा रहे हैं।
राज चौहान के करीबियों ने फेसबुक पर जस्टिस फाॅर राज चौहान नाम से पेज बनाया है। इस पेज पर मोनू यादव को निशाना बनाया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर लगातार की जा रहीं पोस्ट यमुना पार इलाके में फिर से माहौल बिगाड़ सकती हैं।
टेढ़ी बगिया के एसएन स्टे होम गेस्ट हाउस में 23 जनवरी की रात ताबड़तोड़ फायरिंग करके राज चौहान की हत्या की गई थी। हमलावरों ने एक के बाद एक सात गोलियां मारी थीं। 29 जनवरी की तड़के पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपित अरबाज खान उर्फ मंसूरी ढेर हो गया था।
चार साथी पैर में गोली लगने से घायल हुए थे। राज चौहान की हत्या और दो गैंग के बीच दुश्मनी में इंटरनेट मीडिया की अहम भूमिका रही। इंटरनेट मीडिया पर ही मंसूरी ने राज चौहान की हत्या का एलान किया था।
राज चौहान के करीबियों ने फेसबुक पर जस्टिस फाॅर राज चौहान नाम से पेज बनाया है। इस पेज पर लगातार आपत्तिजनक पोस्ट की जा रही हैं। हत्या का जिम्मेदार हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव को ठहराया जा रहा है। लगातार हो रहीं पोस्ट से दुश्मनी पनप रही है।
खास बात यह है कि पुलिस की मीडिया सेल की ओर से इसकी निगरानी नहीं की गई है। एसीपी शेषमणि उपाध्याय ने बताया कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों को चिह्निंत करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
33 रंगबाज हुए चिह्नित, कार्रवाई सिर्फ आठ पर
राज चौहान की हत्या के बाद पुलिस ने 33 रंगबाज चिह्नित किए थे। इसकी जल्द धरपकड़ का दावा किया गया था। मुख्य आरोपित मंसूरी के मुठभेड़ में ढेर हो गया। जबकि सात आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
कुल मिलाकर चिह्नित किए गए 33 रंगबाजों में से अभी तक सिर्फ आठ के खिलाफ ही कार्रवाई हो सकी है। अन्य रंगबाज आज भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
इंस्पेक्टर को घर गिफ्ट करने की पोस्ट
फेसबुक पेज पर तरह-तरह की भड़काऊ पोस्ट की जा रही हैं। ट्रांस यमुना थाने में पूर्व में तैनात रहे एक इंस्पेक्टर को भी निशाना बनाया है। पोस्ट में पूर्व में तैनात रहे इंस्पेक्टर को कालिंदी विहार में घर गिफ्ट दिए जाने का आरोप लगाया गया है। |
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