भारत सरकार के Department of Consumer Affairs (उपभोक्ता मामले विभाग) ने एक बड़ा और उपभोक्ता-हितैषी प्रस्ताव पेश किया है. अब सभी E-commerce Platforms (ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स) को अपने वेबसाइट और ऐप्स पर ऐसा फीचर देना होगा, जिससे ग्राहक किसी भी प्रोडक्ट को उसके Country of Origin (मूल देश) के आधार पर सर्च और सॉर्ट कर सके.
सरकार ने इसके लिए Legal Metrology (Packaged Commodities) (Second) Amendment Rules, 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है. इस बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी देकर Transparency (पारदर्शिता) बढ़ाना और उन्हें अपने खरीद निर्णय में ज्यादा सशक्त बनाना है.
इस नए ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि हर ई-कॉमर्स कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फिल्टर देना होगा जिससे ग्राहक प्रोडक्ट्स को देश के आधार पर सॉर्ट कर सके. यानी अब आप “Made in India” या “Made in China” जैसी खोज आसानी से कर पाएंगे.
ड्राफ्ट में कहा गया है- “हर ई-कॉमर्स एंटिटी जो इम्पोर्टेड प्रोडक्ट बेचती है, उसे Country of Origin के लिए सर्चेबल और सॉर्टेबल फिल्टर देना होगा.” इस बदलाव से ग्राहक अब पारदर्शी तरीके से जान पाएंगे कि वह जो सामान खरीद रहे हैं, वो भारतीय (Indian) है या विदेशी (Foreign).
यह प्रस्ताव सीधे तौर पर ‘Atmanirbhar Bharat (आत्मनिर्भर भारत)’ और ‘Vocal for Local’ पहल को सपोर्ट करता है. अब भारतीय निर्माता अपने प्रोडक्ट्स को ‘Made in India’ टैग के साथ प्रमोट कर पाएंगे और ग्राहकों को भी यह समझने में आसानी होगी कि वे देश के प्रोडक्ट्स को चुन रहे हैं या नहीं.

सरकार ने इस ड्राफ्ट को पब्लिक कंसल्टेशन (Public Consultation) के लिए वेबसाइट पर जारी किया है. कोई भी नागरिक या संस्था इस पर अपनी राय दे सकती है. इसकी लास्ट डेट 22 नवंबर 2025 है. आप dirwm-ca@nic.in, ashutosh.agarwal13@nic.in और mk.naik72@gov.in पर अपनी राय दे सकते हैं. लोगों की राय मिलने के बाद ही सरकार इस नियम को फाइनल रूप देगी और इसे लागू करेगी.
अगर यह नियम लागू होता है, तो ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे Amazon, Flipkart, Meesho, Nykaa, Myntra आदि को अपने प्लेटफॉर्म्स पर Country of Origin फिल्टर जोड़ना होगा. इससे-
ग्राहकों को खरीद निर्णय में आसानी होगीविदेशी प्रोडक्ट्स की पारदर्शिता बढ़ेगीलोकल ब्रांड्स को बराबर मौका मिलेगागैर-अनुपालक कंपनियों पर जुर्माना लग सकता है
यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि Digital India के तहत Smart Consumerism (स्मार्ट उपभोक्ता सोच) की दिशा में कदम है. अब ई-कॉमर्स सेक्टर में ज्यादा भरोसा, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा आएगी, जिससे पूरा डिजिटल मार्केटप्लेस और मजबूत बनेगा.
सरकार का यह प्रस्ताव ऑनलाइन शॉपिंग की पारदर्शिता को एक नया स्तर देने वाला है. इससे न सिर्फ उपभोक्ता जागरूक होंगे, बल्कि भारतीय उत्पादों की पहचान और मांग भी बढ़ेगी. यह कदम देश की आत्मनिर्भरता और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.
यह कानून पैकेज्ड सामानों की लेबलिंग, वजन और मापदंड तय करता है.
वह देश जहां कोई प्रोडक्ट बनाया या असेंबल किया गया है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जहां उपभोक्ता प्रोडक्ट्स खरीदते हैं, जैसे Amazon या Flipkart.
अभी ड्राफ्ट स्टेज में है, जनता की राय के बाद फाइनल होगा.
सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जो पैकेज्ड या इम्पोर्टेड सामान बेचते हैं.
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