Indian Army Robot Sanjay: भारतीय सेना भी अब एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ युद्ध के मैदान में और शक्तिशाली बन रही है. दुर्गम पहाड़ियों, पतली और खतरनाक गुफाओं और बर्फीले रास्तों पर जहां इंसानी कदम डगमगा सकते हैं वहां अब 'संजय' मोर्चा संभालेगा. संजय कोई इंसान नहीं बल्कि लोहे और अत्याधुनिक तकनीक से बना एक 'रोबोटिक मशीन' है. जो एडवांस सेंसर से बना एक चार पैरों वाला रोबोट है जो दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दम पर भारतीय सेना भी अब भविष्य के युद्धों के लिए खुद को तैयार कर रही है. भारतीय सेना में शामिल संजय नाम के मेटल वॉरियर को म्यूल (Mule)की भी तरह इस्तेमाल किया जा सकता है जो न केवल टेक्नोलॉजी का कमाल है बल्कि युद्ध क्षेत्र में भारतीय जवानों के लिए एक मजबूत साथी भी साबित होने वाला है.
क्या है 'संजय' और क्यों है यह खास?
संजय एक मल्टी-यूटिलिटी रोबोटिक प्लेटफॉर्म है जिसे विशेष रूप से उन इलाकों के लिए तैयार किया गया है जहां इंसानों या पहियों वाले वाहनों का जाना बहुत ही मुश्किल होता है. इसे बहुत से लोग रोबोटिक डॉग भी कहते है क्योंकि इसकी बनावट और चलने का तरीका ही डॉग के जैसे है. यह ऊबड़-खाबड़ रास्तों, सीढ़ियों और संकरी पहाड़ी पगडंडियों पर बिना गिरे तेजी से चल सकता है.
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सर्विलांस और बम डिटेक्शन में महारत
इस मेटल वॉरियर की सबसे खास बात है इसकी निगरानी क्षमता. संजय एडवांस सेंसरों, थर्मल कैमरों और हाई-डेफिनिशन कैमरों से लैस है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह दुश्मन के इलाके में बिना किसी आहट के घुसकर रियल-टाइम वीडियो फीड हेडक्वार्टर तक भी भेजने में सक्षम है. इसके साथ ही इसमें बम डिटेक्शन की भी क्षमता है. खतरनाक इलाकों में जहां बारूदी सुरंगें बिछी हो सकती हैं वहां जवानों को भेजने से पहले संजय को भेजा जा सकता है जो अपनी सेंसर टेक्नोलॉजी से खतरे को पहचान लेता है और जवानों की जान बचाने में मदद करता है.
वजन उठाने की भी है ताकत
अक्सर ऊंचे पहाड़ी इलाकों जैसे सियाचिन या लद्दाख में जवानों को भारी गोला-बारूद और राशन लेकर खुद ही चलना पड़ता है. संजय को एक म्यूल की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यह भारी वजन उठाने में सक्षम है, जिससे सैनिकों की शारीरिक थकान कम होगी. यह 15 किलो वजन उठाकर 10 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ सकता है सबसे खास बात यह है कि यह भयंकर बर्फबारी में भी बिना किसी समस्या के काम कर सकता है. यह रोबोट -40 डिग्री की जमा देने वाली ठंड से लेकर +55 डिग्री की झुलसा देने वाली गर्मी में भी सीना तानकर खड़ा रहता है. यह रोबोट पूरी तरह से रिमोट कंट्रोल से चलने के साथ-साथ ऑटोनॉमस मोड पर भी काम कर सकता है यानी इसे एक बार रास्ता समझा देने पर यह खुद समस्याओं से बचते हुए मंजिल तक पहुंच सकता है.
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आतंकी घुसपैठ को भी रोकेगा संजय

भारतीय सेना में संजय का शामिल होना आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस टेक्नोलॉजी की बढ़ती ताकत का प्रतीक है. टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में आतंकी घुसपैठ को रोकने में ये रोबोटिक डॉग्स सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे. ये रोबोट न केवल रिस्क फैक्टर को कम करते हैं बल्कि अंधेरे में भी देख पाने की क्षमता के कारण 24/7 एक्टिव रहते हैं.
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