
बताते चले कि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि यह समझौता दुनिया की दो विशाल अर्थव्यवस्थाओं के बीच अटूट विश्वास और सहयोग का प्रमाण है। इस डील का सीधा सकारात्मक प्रभाव भारत के औद्योगिक ढांचे, ऊर्जा सुरक्षा और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। पीएम मोदी के अनुसार, यह संधि भारत की विनिर्माण क्षमताओं (Manufacturing Prowess) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी और सेवा क्षेत्र (Service Sector) को विकास की एक नई संजीवनी प्रदान करेगी।
आपको बता दे कि, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में एक निर्णायक वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy), हाइड्रोजन मिशन, और तेल व गैस क्षेत्र में भारत की प्रगति को दुनिया सराह रही है। देश में निरंतर हो रहे नीतिगत सुधारों ने एक पारदर्शी निवेश अनुकूल वातावरण (Investment Friendly Environment) तैयार किया है, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
यह नया FTA पिछले साल भारत और ब्रिटेन (UK) के बीच हुए व्यापार समझौते के लिए एक पूरक (Support) के रूप में कार्य करेगा। इन दोनों समझौतों के मिलने से पूरे यूरोपीय महाद्वीप के साथ भारत का व्यापारिक संतुलन बेहतर होगा। सरकार का लक्ष्य इस साझेदारी के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और तकनीकी सहयोग (Technical Collaboration) के जरिए भविष्य की चुनौतियों का समाधान करना है।
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन गोवा में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा किया गया। इस वैश्विक शिखर सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और दुनिया भर के नीति विशेषज्ञों ने शिरकत की। यह मंच भारत की ऊर्जा जरूरतों और उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भूमिका को प्रदर्शित करने का एक बड़ा माध्यम बना है।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सम्मेलन में कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत वर्तमान में शीर्ष पांच पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देशों में शामिल है और 150 से अधिक देशों को अपनी सेवाएं दे रहा है। भारत-EU के बीच यह तालमेल वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 25% और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, जो 140 करोड़ भारतीयों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा।
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