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Drone अटैक को रोकेगा 'SAKSHAM'! भारतीय सेना पूरे देश में बना रही AI 'एंटी-ड्रोन ग्रिड', BEL की मेहनत रंग लाई

deltin55 Yesterday 21:13 views 3

SAKSHAM system Indian Army: भारतीय सेना अपनी ड्रोन-रोधी क्षमताओं को जबरदस्त तरीके से मजबूत करने के लिए तैयार है. सेना पूरी तरह से स्वदेशी 'SAKSHAM' सिस्टम को शामिल करने जा रही है. यह एक कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, गाजियाबाद के साथ मिलकर विकसित किया गया है. SAKSHAM को सुरक्षित आर्मी डेटा नेटवर्क पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह कमांडरों को नए रणनीतिक युद्धक्षेत्र अंतरिक्ष में एक एकीकृत और रियल-टाइम RUP यानी Recognised UAS Picture प्रदान करेगा.


क्या है SAKSHAM सिस्टम?
आधुनिक युद्ध में ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन्स और कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, SAKSHAM का अधिग्रहण एक निर्णायक कदम है. TBS यानी रणनीतिक युद्धक्षेत्र अंतरिक्ष की अवधारणा जमीन से 3,000 मीटर ऊपर तक हवाई क्षेत्र की जागरूकता को बढ़ाती है. SAKSHAM का उद्देश्य जमीन और हवा की निगरानी के बीच के पारंपरिक अंतर को पाटना है, जिससे उभरते खतरों पर ज्यादा तेजी से और सटीक प्रतिक्रिया दी जा सके.



यह सिस्टम एक मॉड्यूलर, ग्रिड-आधारित आर्किटेक्चर पर बनी है. यह कई काउंटर-ड्रोन सेंसरों और हमलावर प्रणालियों को एक साथ जोड़ती है. यह सिस्टम रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर, आरएफ डिटेक्टरों और अन्य निगरानी उपकरणों से मिली जानकारी को एक साथ मिलाकर, रियल टाइम में एक समेकित ऑपरेशनल तस्वीर बनाता है.


SAKSHAM की AI ताकत
इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है. SAKSHAM में एडवांस AI-चालित खतरे का विश्लेषण करने वाले डिवाइस हैं, जो हवाई लक्ष्यों की पहचान, वर्गीकरण और प्राथमिकता तय करने का काम स्वचालित रूप से करते हैं.


यह सिस्टम इंसानों के प्रतिक्रिया समय को कम करता है और निर्णय लेने में लगने वाले समय को कम करता है. इससे दुश्मन के ड्रोन और कम ऊंचाई वाले हवाई प्लेटफार्मों को बेअसर करने की सटीकता और गति दोनों बढ़ती हैं.


इतना ही नहीं, यह कमांडरों के लिए तुरंत खतरे का अलर्ट और जवाबी कार्रवाई के विकल्प तैयार करता है, जिससे मुश्किल परिस्थितियों में तेजी से हमले का फैसला लिया जा सके.





पूरे देश का 'ड्रोन कवच' ग्रिड
एक बार तैनात होने के बाद, SAKSHAM पूरे भारत के काउंटर-यूएएस ग्रिड की रीढ़ बनेगा. यह सिस्टम जमीन और हवा दोनों क्षेत्रों में निर्बाध स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करेगा. जैसा कि SAKSHAM सुरक्षित आर्मी डेटा नेटवर्क पर काम करता है. यह सुरक्षित डेटा प्रवाह, साइबर खतरों के खिलाफ लचीलापन, और सभी सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है. वहीं, यह प्रणाली सीमाओं, अग्रिम क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर तैनाती के लिए पूरी तरह से उपयोगी है.


आत्मनिर्भरता और तेजी
SAKSHAM का पूरी तरह से स्वदेशी होना और इसे तेजी से शामिल करना, भारतीय सेना की प्राथमिकताओं में से एक है. इस सिस्टम का पूरी तरह से स्वदेशी होना 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. इससे विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम होती है और अपग्रेड्स पर हमारा पूरा नियंत्रण बना रहता है.


वहीं, ड्रोन खतरों की तेजी से बढ़ती चुनौती को देखते हुए, SAKSHAM को फास्ट ट्रैक खरीद (Fast Track Procurement - FTP) मार्ग के तहत मंजूरी मिल गई है. अधिकारियों के मुताबिक, इस जटिल कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म को एक साल के भीतर ही फील्ड में तैनात किए जाने की उम्मीद है, जो विकास से परिचालन तैनाती तक के सबसे तेज ट्रांजिशन में से एक है.


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