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क्रिटिकल मिनरल मिशन से भारत की ऊर्जा और रणनीतिक सुरक्षा को मजबूती

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तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा और तकनीकी परिदृश्य में क्रिटिकल मिनरल 21वीं सदी की नई रणनीतिक पूंजी बनकर उभरे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने 2025 में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य घरेलू और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। यह मिशन केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय रणनीति है।


क्रिटिकल मिनरल: प्रगति की नई करेंसी


स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत प्रौद्योगिकियों की ओर बढ़ती दुनिया में महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण भू-राजनीति का नया मोर्चा बन चुका है। जनवरी 2025 में शुरू किया गया एनसीएमएम 2024-25 से 2030-31 तक सात वर्षों के लिए लागू होगा। इस मिशन के तहत 16,300 करोड़ रुपए का प्रस्तावित व्यय तय किया गया है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य हितधारकों से 18,000 करोड़ रुपए के निवेश की उम्मीद है। लिथियम से लेकर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों तक, यह मिशन भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और रणनीतिक उद्योगों की रीढ़ तैयार करने का प्रयास है।


क्रिटिकल खनिज आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य


क्रिटिकल या महत्वपूर्ण खनिज वे होते हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं। इनका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन, दूरसंचार और रक्षा क्षेत्रों में किया जाता है। इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला अक्सर सीमित और अस्थिर होती है, इसलिए इन्हें सुरक्षित करना सरकारों की प्राथमिकता बन गया है। भारत ने 2023 में अपने लिए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची जारी की थी, जिनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम और ज़िरकोनियम जैसे खनिज शामिल हैं।


स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में क्रिटिकल मिनरल की भूमिका


महत्वपूर्ण खनिज भारत के ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में हैं और सौर ऊर्जा से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक हर क्षेत्र को शक्ति प्रदान करते हैं।


सौर ऊर्जा


फोटोवोल्टिक सेल, जो सौर पैनलों का मूल होते हैं, सिलिकॉन, टेल्यूरियम, इंडियम और गैलियम जैसे तत्वों पर निर्भर करते हैं। भारत की 64 गीगावॉट की सौर क्षमता इन्हीं खनिजों पर आधारित है।


पवन ऊर्जा


पवन टर्बाइनों में नियोडिमियम और डिस्प्रोसियम से बने उच्च क्षमता वाले मैग्नेट का उपयोग होता है। 2030 तक भारत की पवन ऊर्जा क्षमता को 140 गीगावॉट तक ले जाने के लक्ष्य के साथ इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ेगी।


इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण


इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां लिथियम, निकल और कोबाल्ट पर निर्भर करती हैं। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए आवश्यक लिथियम-आयन स्टोरेज सिस्टम भी इन्हीं खनिजों पर आधारित हैं। 2030 तक 30% ईवी अपनाने के लक्ष्य से इन संसाधनों की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।


भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल का रोडमैप


एनसीएमएम का उद्देश्य भारत को उभरती हरित अर्थव्यवस्था में वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है। मिशन का कानूनी आधार खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन से जुड़ा है, जिसके तहत केंद्र सरकार को 30 में से 24 महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी का विशेष अधिकार मिला है। मिशन अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग, अनुसंधान एवं विकास और मानव संसाधन विकास को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाता है।


अपरंपरागत स्रोतों पर फोकस


एनसीएमएम के तहत सरकार ने 100 करोड़ रुपए की पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य ओवरबर्डन, टेलिंग्स, फ्लाई ऐश और लाल मिट्टी जैसे अपरंपरागत स्रोतों से खनिजों की पुनर्प्राप्ति करना है। इससे औद्योगिक अपशिष्ट को रणनीतिक संपत्ति में बदला जा सकेगा।




रीसाइक्लिंग को बढ़ावा


केंद्रीय कैबिनेट ने एनसीएमएम के तहत 1,500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य ई-कचरा, लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप और पुराने वाहनों के पुर्जों जैसे सेकेंडरी स्रोतों से क्रिटिकल मिनरल की रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाना है। इस पहल के तहत 270 किलो टन वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करने, 40 किलो टन महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन, 8,000 करोड़ रुपए के निवेश और करीब 70,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है।


खनिज आत्मनिर्भरता की स्पष्ट रणनीति


मिशन के तहत भारत 1,000 से अधिक अन्वेषण परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। साथ ही, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों में खनिज परिसंपत्तियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रसंस्करण पार्क, रणनीतिक भंडार, कौशल विकास और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी योजना है।


नवाचार और पेटेंट पर जोर


एनसीएमएम का एक प्रमुख लक्ष्य 2030-31 तक क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन में 1,000 पेटेंट दाखिल करना है। मई 2025 में 21 और जून में 41 पेटेंट दाखिल किए गए, जबकि पेटेंट स्वीकृति की गति भी तेज हुई है। ये पेटेंट लिथियम, निकल, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम और टैंटलम जैसे खनिजों से जुड़ी उन्नत बैटरी, नैनोमटीरियल और रक्षा अनुप्रयोग तकनीकों पर केंद्रित हैं।


खनन क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र


खनन मंत्रालय ने एनसीएमएम के तहत 7 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें 4 आईआईटी और 3 प्रमुख अनुसंधान संस्थान शामिल हैं। इनका उद्देश्य अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना है। इन संस्थानों में आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, आईआईटी रुड़की, सीएसआईआर-आईएमएमटी भुवनेश्वर, सीएसआईआर-एनएमएल जमशेदपुर और एनएफटीडीसी हैदराबाद शामिल हैं।


नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की भूमिका निर्णायक

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