जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय। जागरण
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। जामिया हमदर्द मेडिकल यूनिवर्सिटी और हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (हिम्सर) के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद गंभीर पारिवारिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट बन गया है। संस्थापक हकीम अब्दुल हमीद के वंशजों के बीच संपत्ति और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर छिड़ी लड़ाई से करीब एक हजार मेडिकल छात्रों और इंटर्नों का भविष्य लटक गया है।
पेन डाउन स्ट्राइक पर जाने की चेतावनी
इससे छात्रों में आक्रोश व्याप्त है। व्यवस्था सुधार की मांग को लेकर उन्होंने कुलपति कायार्लय के बाहर धरना-प्रदेश करने के बाद अब अग्ले सप्ताह से पेन डाउन स्ट्राइक पर जाने की चेतावनी दी है। अगर ऐसा हुआ तो मेडिकल काॅलेज अस्पताल में उपचार को आने वाले तथा भर्ती मरीजों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
#सेवहिम्सर जैसे नारे और हैशटैग गूंजते रहे
छात्रों का कहना है कि संपत्ति और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर छिड़े इस पारिवारिक कलह का सीधा असर उनकी पढ़ाई, परीक्षाओं, रिजल्ट और डिग्री पर पड़ रहा है। हालात से परेशान छात्रों ने हाल ही में कुलपति कार्यालय के बाहर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कैंपस में #सेवहिम्सर जैसे नारे और हैशटैग गूंजते रहे।
कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई
हालांकि, यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डाॅ.) एम. अफशर आलम ने छात्रों से बातचीत कर आश्वासन दिया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी और विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत निकलेगा। हिम्सर के डीन प्रो. (डाॅ.) मुशर्रफ हुसैन ने भी मदद का भरोसा दिलाया, हालांकि प्रशासन ने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई।
विवाद की जड़ और बिगड़ते हालात
छात्र संघ अध्यक्ष लक्ष्य शर्मा के अनुसार, वर्ष 2018 में अब्दुल मुईद के निधन के बाद हमदर्द संस्थानों पर नियंत्रण को लेकर परिवार के दो गुट आमने-सामने आ गए। फैमिली सेटलमेंट डीड के तहत हिम्सर को जामिया हमदर्द से अलग करने व प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर सहमति बनी थी पर, बाद में मामला अदालतों में उलझता चला गया। दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट व आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में एक के बाद एक मुकदमे चलने से स्थिति जटिल होती चली गई। वर्ष 2025 में यूनिवर्सिटी द्वारा हिम्सर से एफिलिएशन वापस लेने के बाद 150 एमबीबीएस और 49 पीजी सीटें बंद हो गईं। परीक्षाएं रद्द होने लगीं, रिजल्ट अटक गए और डिग्रियों का वितरण ठप पड़ गया।
फैकल्टी का पलायन, मरीजों पर असर
इस पारिवारिक विवाद का असर फैकल्टी पर भी साफ दिख रहा है। कई प्रोफेसर और डाक्टर संस्थान छोड़कर जा चुके हैं। इससे न केवल कक्षाएं और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रभावित हुई है, बल्कि हिम्सर से जुड़े अस्पताल में उपचार व्यवस्था चरमरा गई है। ओपीडी में लंबी कतारें, सर्जरी टलना और डाक्टरों की कमी अब आम बात हो गई है। छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब मरीजों के लिए यह अस्पताल आखिरी सहारा था, जो अब डगमगा रहा है।
छात्र संघ की चेतावनी
छात्र संघ अध्यक्ष लक्ष्य शर्मा ने कहाकि ‘यह पारिवारिक लड़ाई नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की लड़ाई बन चुकी है। हमने लाखों रुपये फीस दी है, लेकिन न परीक्षाओं की गारंटी है, न डिग्री की। मांग की कि प्रशासनिक झगड़ों से छात्रों को अलग रखा जाए, समय पर रिजल्ट और डिग्री दी जाए, वरना हम आंदोलन तेज करने को मजबूर होंगे। चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे ‘पेन डाउन स्ट्राइक’ पर जाएंगे, जिसमें कक्षाओं, परीक्षाओं और अस्पताल ड्यूटी का बहिष्कार किया जाएगा।’
इंतजार में छात्र, नजर सरकार पर
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बातचीत कर आश्वासन तो दिया है, लेकिन ठोस कदम अब तक सामने नहीं आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला निजी मेडिकल शिक्षा में गवर्नेंस की गंभीर कमी को उजागर करता है। छात्र अब सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उनका भविष्य और मरीजों की सेहत दोनों बचाई जा सके।
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