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टीम मेंवरिक इंडिया के सदस्य विटाल और हेक्साकाप्टर ड्रोन को प्रदर्शित करते हुए। जागरण फाइल फोटो
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। दुर्गम जंगलों में छिपे संदिग्धों, आतंकियों की तलाश में सेना के जवानों को अब परेशानी नहीं होगी। सर्च आपरेशन में ड्रोन उनके मददगार होंगे, ऐसे स्थानों से 25 किमी दूर बैठकर भी सेना के जवान ड्रोन के जरिए वहां जानकारी जुटा सकेगा।
मौके पर मौजूद है तो ड्रोन से जानकारी मिलने पर निशाना भी बना सकेगा। पिंपरी चिंचवड़ कालेज आफ इंजीनियरिंग पुणे के टीम मेंवरिक इंडिया टीम ने प्राब्लम स्टेटमेंट के तहत विटाल और हेक्साकाप्टर ड्रोन को तैयार किया है।
हाल ही में गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित हुए सात दिवसीय निडर कार्यक्रम में प्रदर्शित किया था। टीम का नेतृत्व कर रहे रितिक लिपाटे के अनुसार भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रोद्योगिक मंत्रालय के प्राब्लम स्टेटमेंट के तहत विटार और हेक्साकाप्टर दो ड्रोन तैयार किेए हैं।
सेंसर से दुश्मनों को करेगा डिटेक्ट
इसमें से विटार ड्रोन जंगलों में छिपे दुश्मनों को कैमरे में लगे सेंसर की मदद से स्कैन कर डिटेक्ट करेगा। ड्रोन के कैमरे में थर्मल सेंसर का उपयोग किया गया है, जिसे मशीन लर्निंग के माध्यम से तैयार किया गया है।
फोटो - विटाल और हेक्साकाप्टर ड्रोन। फाइल फोटो
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इसकी मदद से किसी भी दुर्गम क्षेत्रों के व्यक्ति को स्कैन करने के साथ ही डिटेक्ट कर सकेगा और अपने साथी हेक्साकाप्टर ड्रोन को मैसेज भेजकर अलर्ट करेगा और लाइव वीडियो इमेज भेजकर अधिकारियों को जंगली इलाकों में छिपे संदिग्धों की संख्या के साथ ही उनके पास मौजूद सामग्री तक डिटेक्ट कर अपडेट करेगा।
यह ड्रोन उनकी आवाज को भी रिकार्ड करने में सक्षम हैं। साथ ही अपने साथी ड्रोन हेक्साकाप्टर को हमला करने के लिए मैसेज करेगा और उनके ऊपर हमला करने में सक्षम होगा।
ड्रोन को 25 किमी दूर से किया जा सकता है संचालित
टीम के सदस्यों ने बताया कि यह दोनों ड्रोन 25 किमी दूरी से बैठकर संचालित किए जा सकते हैं और इनकी उड़ान भरने की 60 से 100 मीटर ऊंचाई तक की क्षमता है। यदि यह ड्रोन किसी चीज से टकराकर गिर जाते हैं, तब उनमें रिकार्ड किए गए वीडियो और आडियो सुरक्षित रहेंगे।
इनमें रिकार्ड किए जाने वाले वीडियो और आडियो लाइव ही संचालित किए जाने वाले स्थान के कर्मचारी के पास पहुंचने के चलते उन साक्ष्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।
पुरस्कार सम्मान समारोह में टीम होगी सम्मानित
टीम में अंशुल, दर्शन, मांशी, केदार कुलकर्णी, सम्मीद वोहरा, निमिषा, आर्यन शामिल हैं। इन्होंने बताया कि इसमें हिंदी-अंग्रेजी, उर्दू समेत सभी भाषाओं का समझने की क्षमता है। इनका उपयोग आपातकाल स्थिति में लैंडस्लाइड वाले स्थानों पर भी उपयोग किया जा सकता है।
इस टीम ने जीबीयू में आयोजित हुए निडर कार्यक्रम में विजेता घोषित हुए हैं और इन्हें दिल्ली में फरवरी में आयोजित होने वाले चार लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। और मंत्रालय द्वारा पेटेंट कराने से लेकर तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।
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