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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विदेश दौरे पर, टूट गई गणतंत्र दिवस पर झारखंड की स्थापित एक परंपरा

cy520520 2026-1-26 10:57:40 views 1272
  

दुमका में ध्वजारोहण के बाद परेड की सलामी लेते उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व उनकी पत्नी कल्पना सोरेन (फाइल फोटो)।



जागरण संवाददाता, दुमका। Hemant Soren: झारखंड में 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर ध्वजारोहण को लेकर एक स्थापित परंपरा रही है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य की राजधानी रांची में मुख्यमंत्री और उप राजधानी दुमका में राज्यपाल ध्वजारोहण करते हैं। इसी प्रकार गणतंत्र दिवस पर राजधानी रांची में राज्यपाल और उप राजधानी दुमका में मुख्यमंत्री ध्वजारोहण करते रहे हैं। हालांकि इस वर्ष यह परंपरा टूट गई।

इस साल दुमका पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्थान पर उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने ध्वजारोहण किया। वहीं राजधानी रांची में परंपरा के अनुसार राज्यपाल ने ध्वजारोहण किया। 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य गठन के बाद से ही ध्वजारोहण की यह परंपरा चली आ रही थी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में पूंजी निवेश की संभावनाओं की तलाश के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश दौरे पर हैं। इसी कारण वे गणतंत्र दिवस पर दुमका में राष्ट्रीय ध्वज फहराने नहीं पहुंच सके। उनके अनुपस्थित रहने पर उपायुक्त ने ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुमका पुलिस लाइन में आयोजित मुख्य समारोह में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली और जिलेवासियों को संबोधित किया। उन्होंने देश के संविधान निर्माताओं, स्वतंत्रता सेनानियों तथा झारखंड के महान जननायकों को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।

उपायुक्त ने कहा कि राज्य सरकार के नेतृत्व में दुमका जिला प्रशासन समावेशी विकास, पारदर्शी प्रशासन और जनसहभागिता के प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि दुमका हवाई अड्डे पर फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत से राज्य के युवाओं, विशेषकर जनजातीय विद्यार्थियों को व्यावसायिक पायलट प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। पेसा नियम लागू होने से जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाया गया है।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन, ‘दीदी की दुकान’ और अन्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हजारों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, आवास योजनाओं तथा रोजगार सृजन कार्यक्रमों के माध्यम से कमजोर वर्गों को लाभान्वित किया जा रहा है।

कृषि, सिंचाई, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, चलंत चिकित्सा इकाइयों और मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नई सुविधाओं का जिक्र भी किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट विद्यालय, बालिका आवासीय विद्यालय और मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अंत में उपायुक्त ने पलायन रोकने, बुनियादी ढांचा मजबूत करने, पर्यटन और खेल सुविधाओं के विकास के प्रयासों का उल्लेख करते हुए सभी नागरिकों से संविधान के आदर्शों के अनुरूप जिले के विकास में भागीदारी का आह्वान किया।
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