सांकेतिक तस्वीर।
जागरण टीम, आगरा। 40 लाख की साइबर ठगी रैकेट में वांटेड राष्ट्रीय स्तर के शूटर हिमांशु चौहान को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने आगरा से गिरफ्तार किया है। इसका नाम बीते वर्ष 25 जून को दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी जिले के साइबर थाने में दर्ज 40 लाख की ठगी में मल्टी-लेयर्ड साइबर अपराध सिंडिकेट में एक मुख्य आपरेटिव के रूप में सामने आया था।
आरोपित हिमांशु राष्ट्रीय स्तर का शूटर है, जिसने राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर व ब्रांज मेडल जीते हैं। स्टेट लेवल चैंपियनशिप में .22 राइफल से 50 मीटर और 300 मीटर राइफल इवेंट में गोल्ड मेडल जीत चुका है। गुरुवार को गेस्ट हाउस में मारे गए राज चौहान का वह खास दोस्त है। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर उसके घर तक वह स्वजन के साथ भी रहा था।
स्टेट लेवल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुका है
नई दिल्ली में पीड़ित ने फर्जी आनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म और धोखाधड़ी वाले स्टाक ट्रेडिंग व आइपीओ निवेश स्कीम में फंसाया गया। इसके बाद आईएमपीएस, एनईएफटी और यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिये पैसे ट्रांसफर करवाए गए। जांच में पता चला कि सिंडिकेट से जुड़े एक्सिस बैंक के खाते में आठ लाख की ठगी की रकम पहुंची थी।
एनसीआरपी पोर्टल के एनालिसिस से पता चला कि एक ही बैंक खाते के खिलाफ बेंगलुरु व मुंबई के साइबर साउथ पुलिस थाने में 40 शिकायतें हैं और दो एफआईआर दर्ज हैं, जिससे पता चलता है कि यह गिरोह पूरे देश में फैला है।
गेस्ट हाउस में मारे गए राज चौहान का दोस्त है आरोपित
पहले गिरफ्तार किए गए सह-आरोपितों से पूछताछ में पता चला कि हिमांशु चौहान ने ठगी के पैसे लेने के लिए लोगों से बैंक खाते अरेंज करने के लिए सिंडिकेट में अहम भूमिका निभाई। उसने वादा किया कि हर खाते पर एक-एक लाख रुपये दिए जाएंगे। उसने म्यूल अकाउंट प्रोवाइडर्स और साइबर ऑपरेटरों के बीच एक अहम कड़ी के तौर पर काम किया और व्यवस्थित तरीके से ऐसे खातों को आगरा के रहने वाले एक-दूसरे साथी को ट्रांसफर कर दिया, ताकि ठगे गए पैसे को आगे भेजा जा सके और लेयरिंग की जा सके।
एक लाख रुपये का लालच देकर खरीदता था बैंक खाते
आरोपित को पकड़ने के लिए एसीपी टीम गठित की गई थी। टीम ने एडवांस्ड तकनीक की मदद से जांच शुरू की। पता चला कि आरोपित बार-बार लोकेशन बदल रहा है। रियल-टाइम टेक्निकल इनपुट की मदद से आरोपित को आगरा से दबोच लिया। आरोपित म्यूल-अकाउंट प्रोवाइडर्स और ऊंचे लेवल के साइबर आपरेटरों के बीच अहम कड़ी का काम करता था और ऐसे खाते को दूसरे साथी को देता था। हिमांशु चौहान मूल रूप से बरहन के चावली गांव का रहने वाला है। वह ट्रांस यमुना क्षेत्र में रह रहा था। |
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