ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का दौरा करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचने वाली ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारत के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है।
पिछले साल जून में 41 साल के ग्रुप कैप्टन शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने थे। वह एक्सिओम-4 मिशन के हिस्से के तौर पर आईएसएस गए थे। भारतीय वायु सेना (IAF) के टेस्ट पायलट की 18 दिन की अंतरिक्ष यात्रा राकेश शर्मा के 41 साल बाद हुई। उन्होंने 1984 में ये कारनामा किया था।
राष्ट्रपति मुर्मु ने दी मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी, जिनमें से छह को यह सम्मान मरणोपरांत मिलेगा। इनमें एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (जिसमें एक मरणोपरांत शामिल है), एक बार टू सेना मेडल (वीरता) और 44 सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं। कीर्ति चक्र पुरस्कार विजेताओं में मेजर अर्शदीप सिंह, नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर हैं।
शुभांशु को कई फाइटर जेट उड़ाने का है अनुभव
एक फाइटर पायलट के तौर पर ग्रुप कैप्टन शुक्ला के पास सुखोई-30MKI, MiG-21, MiG-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और An-32 जैसे अलग-अलग एयरक्राफ्ट में 2,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का शानदार अनुभव है।
मिशन को बताया था देश की बड़ी उपलब्धि
उनकी स्पेस फ्लाइट ने भारत की अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और जल्द ही भारत अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का रास्ता तैयार किया।
उन्होंने पिछले साल कहा था, “यह मिशन हमारे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह सही समय पर आया है। भारत अपने ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन, गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और आखिरकार चांद पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।“
उन्होंने कहा था, “हमने इस (एक्सिओम) मिशन से जो कुछ भी सीखा है, मुझे लगता है कि वे हमारे मिशन के लिए बहुत अनोखे और महत्वपूर्ण हैं। आने वाले महीनों और सालों में हमारी कोशिश होगी कि हम उन सीखों को अपने मिशन में इस्तेमाल करें।“
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