गणतंत्र दिवस के मौके पर यह समझौता 18 साल बाद अपने अंतिम पड़ाव पर है। ( AI फोटो)
नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच व्यापार वार्ता 27 जनवरी को पूरी हो सकती है। इसका मकसद अमेरिकी टैरिफ (Trump Tariff) की वजह वैश्विक व्यापार में आई रुकावटों के बीच दोनों इलाकों के बीच आर्थिक रिश्तों को बढ़ाना है। यह समझौता 18 साल बाद अपने आखिरी पड़ाव पर है। इस समझौत पर बातचीत वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भारत द्वारा अब तक किए गए व्यापार समझौतों में सबसे बड़ा सौदा बताया है।
एक अधिकारी ने कहा कि समझौते पर बातचीत समाप्त होने का एलान यहां इंडिया-ईयू समिट में की जाएगी। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट अर्सला वान डेर लेयेन चार दिन के दौरे पर शनिवार को यहां आ चुकी हैं। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और अर्सला 27 जनवरी को समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत करेंगे।
दरअसल, भारत और 27 देशों का समूह कल व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने का एलान जरूर करेंगे, लेकिन समझौते में शामिल बिंदुओं की जांच-पड़ताल के बाद आपसी सहमति से बाद में इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते को लागू होने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि इसके लिए यूरोपियन यूनियन संसद की मंजूरी जरूरी है। हालांकि, भारत में इसके लिए सिर्फ कैबिनेट की मंजूरी चाहिए होगी।
समझौता होते ही 90 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादों पर आयात शुल्क हो जाता है शून्य
ऐसे समझौतों में दोनों पक्ष अपने बीच ट्रेड होने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा सामान पर आयात शुल्क को या तो कम या खत्म कर देते हैं। कई उत्पाद (जैसे टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे रोजगारपरक सेक्टर से) पर, ट्रेड समझौते के लागू होने के पहले दिन ही ड्यूटी खत्म हो जाती है। कुछ चीजों पर ड्यूटी पांच, सात या दस साल में धीरे-धीरे खत्म या कम की जाती है। दोनों पक्ष अल्कोहलिक ड्रिंक्स और आटोमोबाइल जैसे कुछ सेक्टर के लिए कोटा-आधारित बाजार पहुंच भी प्रदान करते हैं, जबकि छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा के लिए कुछ कृषि उत्पादों पर किसी तरह की शुल्क कटौती नहीं की जाती है।
एफटीए से भारतीय निर्यातकों को विविधीकरण लाने में मदद मिलेगीयह समझौता इसलिए जरूरी है, क्योंकि अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। एफटीए से भारतीय निर्यातकों को विविधीकरण लाने में मदद मिलेगी और इससे चीन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
ईयू बाजार भारत के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है और इस ग्रुप का भारत को निर्यात उसके कुल विदेशी शिपमेंट का नौ प्रतिशत है। 2024-25 में ईयू के साथ भारत का वस्तु व्यापार 136.53 अरब डालर (75.85 अरब डालर का निर्यात और 60.68 अरब डालर का आयात) था। इस तरह ईयू भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया।
यूरोपीय यूनियन से जुड़ीं खास बातें Vs भारत
| पैरामीटर | यूरोपीय यूनियन (EU) | भारत | | जीडीपी (GDP) | 20 ट्रिलियन डॉलर | 4.18 ट्रिलियन डॉलर | | आबादी (Population) | 45 करोड़ (450 मिलियन) | 140 करोड़ (1.4 बिलियन) | | निर्यात (Exports) | 2.9 ट्रिलियन डॉलर | 824.5 अरब डॉलर (0.8245 ट्रिलियन) | | आयात (Imports) | 2.6 ट्रिलियन डॉलर | 915 अरब डॉलर (0.915 ट्रिलियन) |
दोनों तरफ के कारोबारी और लोगों की तरक्की के लिए प्रतिबद्ध: गोयल
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि भारत और ईयू दोनों तरफ के कारोबारी और लोगों की तरक्की के लिए एक आपसी फायदेमंद और बड़े मुक्त व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईयू भारत के लिए एक जरूरी आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। इंटरनेट मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में गोयल ने ईयू ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफ्कोविक का स्वागत करते हुए कहा, कि मुझे यह मानते हुए खुशी हो रही है कि पिछले एक साल में हमारे और हमारी टीमों के बीच लगातार हुई बातचीत ने हमें एक अच्छे नतीजे के करीब पहुंचाया है।
वहीं मारोस ने कहा कि गोयल के साथ उनकी यह 10वीं व्यक्तिगत मुलाकात होगी। उन्होंने कहा, मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि हम अपनी एफटीए बातचीत के अंतिम दौर में है। |
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