सेक्टर 150 में जिस जगह युवराज की मौत हुई थी, वहां शनिवार को भी खड़े रहे लोग। जागरण
जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-150 के पास एक निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) का मुख्य फोकस घटनास्थल पर है। सूत्रों के असार, एसआईटी ने पूछा है कि भूखंड किस उद्देश्य से आवंटित किया गया, निर्माण से पहले सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई और खतरनाक स्थिति बनने के बावजूद प्राधिकरण ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?
अधिकारियों से आवंटन से जुड़ी फाइल व शर्तों के पालन का रिकॉर्ड संबंधी सवाल किए गए। कब भरना शुरू हुआ पानी, किसे थी सबसे पहले जानकारीः एसआईटी ने पूछा कि भूखंड में पानी कब भरना शुरू हुआ और इसकी जानकारी किस अधिकारी को थी।
जांच टीम ने इसे प्रशासनिक लापरवाही माना। एसआईटी ने स्पष्ट किया कि यह देखा जाएगा कि हादसे के दौरान किन अधिकारियों के पास निर्णय लेने की जिम्मेदारी थी और उन्होंने क्या कार्रवाई की? तत्कालीन इंजीनियरिंग, परियोजना और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका जांच के केंद्र में है।
बचाव कार्य में 2 घंटे की देरी क्यों हुई?
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर की रात नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई। इस घटना को लेकर प्रशासन ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी। एसआईटी ने नोएडा अथॉरिटी समेत तीन विभागों से ढेर दर्जन से ज्यादा सवाल पूछे। साथ ही जवाब में नोएडा अथॉरिटी ने 150 पेज की रिपोर्ट सौंपी। इसके अलावा पुलिस विभाग ने 450 पेज की रिपोर्ट एसआईटी को दी।
एसआईटी का सवाल था कि बचाव कार्य में 2 घंटे की देरी क्यों हुई? अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए। हादसे के वक्त मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नोएडा में युवराज मेहता की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है।
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