मध्य प्रदेश में एक साल में 55 बाघों की मौत। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में सर्वाधिक 785 बाघ वाले मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 में बाघों की मौत के 55 मामले सामने आए हैं। इसके चलते राज्य के बाघ प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने वन क्षेत्र के आसपास मानव आवागमन को नियंत्रित करने और मनुष्यों व बाघों के बीच द्वंद्व रोकने के लिए तीन वर्षीय कार्य योजना बनाकर वर्ष 2025 में 145 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
जना के तहत इस मद में एक वर्ष में करीब 50 करोड़ रुपये व्यय करने का बजट है। इसके बावजूद बाघों की मौत थम नहीं रही है। बाघों की सुरक्षा को लेकर वन बल प्रमुख व्हीएन अम्बाड़े वन अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं। वन्यप्राणी विशेषज्ञ भी वन विभाग की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। हालांकि, वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन बाघों की मौत को स्वाभाविक मान रहे हैं।
उनका तर्क हैं कि बाघों का सर्वाइवल रेट 50 प्रतिशत से भी कम होता है। ऐसे में इतनी मौत अप्रत्याशित नहीं हैं। वन विभाग के अनुसार, प्रदेश में मौतों के मुकाबले बाघों की संख्या बढ़ी है। वन विभाग के अनुसार, प्रदेश में 55 बाघों में से 38 की मौत आपसी संघर्ष, बीमारी, ट्रेन एवं सड़क दुर्घटना से हुई। वन विभाग के अधिकारी 38 मौतों को प्राकृतिक ही मानते हैं। वहीं, 11 घटनाएं शिकार की है, जिनमें आठ मौतें करंट लगने से हुईं।
माना जा रहा है कि शिकारियों ने इन बाघों को करंट से मारा, लेकिन वन विभाग के अधिकारी इसे भी हादसा बताते हैं। हालंकि, छह बाघों के शिकार में आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से बाघ के अवशेष भी मिले हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार को लेकर जारी किया था अलर्ट वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व व उससे सटे क्षेत्रों में बाघों के शिकार की आशंका जताई थी। इस संबंध में अलर्ट भी जारी किया गया था। मैदानी अमले को शिकारियों की तलाश करने के निर्देश दिए गए थे।
वहीं, वन बल प्रमुख वीएन अम्बाडे ने सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व के अंदर बाघ एवं अन्य वन्यजीवों का शिकार एवं हड्डियां आदि मिलना अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बाघों की मौत की विभिन्न घटनाओं का जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों को बताया है।
सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन ने कहा कि बाघों का सर्वाइवल रेट 50 प्रतिशत से भी कम होता है। रही शिकार की बात तो इसकी आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हमने हाई अलर्ट जारी किया है। शिकारियों की धर-पकड़ भी की जा रही है।
- बाघों की वर्ष वार मौत
- वर्ष ---- भारत ----मप्र.
- 2019-- 96-------29
- 2020-- 106------29
- 2021-- 127-- ---45
- 2022-- 121----- 39
- 2023-- 178----- 44
- 2024-- 126----- 46
- 2025-- 166----- 55
उत्तराखंड में एक बाघ पर आठ लाख खर्च
2025 में 19 बाघों ने गंवाई जानदेश के वन्यजीव मानचित्र पर उत्तराखंड एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। 560 बाघों के साथ यह राज्य संख्या के मामले में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। पिछली गणना के अनुसार यहां कार्बेट टाइगर रिजर्व में सर्वाधिक 260 बाघ हैं, जबकि शेष राजाजी टाइगर रिजर्व समेत 12 वन प्रभागों के अंतर्गत हैं।
राज्य में बजट के आधार पर देखें तो एक बाघ पर सालाना औसत खर्च सात से आठ लाख रुपये के बीच आता है। राज्य में वर्ष 2025 में 19 बाघों की मौत हुई, जबकि 2024 में 16 और 2023 में 22 बाघों की मौत हुई। बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक व आपसी संघर्ष के साथ सड़क दुर्घटना रही है। इन वर्षों में बाघों के शिकार का कोई मामला सामने नहीं आया। |
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