नीचे सोनम की हिरासत को लेकर कुछ प्रतिक्रियाएं पढ़िए…
शीतल पी सिंह-
सोनम वांगचुक बौद्ध धर्म को मानने वाले लद्दाख के जिस आदिवासी समुदाय से आते हैं उसकी कुल तादाद पौने तीन लाख भी नहीं है लेकिन कल उनकी गिरफ़्तारी को सही ठहराने की भारतीय सरकार, भारतीय दक्षिणपंथ और भारतीय Monstrous मीडिया के करोड़ों कारकुनों की असाध्य कोशिशों के बावजूद देश विदेश के लाखों लोगों ने लानत मलानत की।
#FreeSonamWangchuk X पर ट्रेंड कर गया। उनकी पुरानी क्लिप्स Instagram पर वायरल हैं और देश दुनिया के लगभग सभी न्यायप्रिय लोगों ने सरकार द्वारा उनपर NSA लगाने के फ़ैसले को ग़लत ठहराया जबकि लोगों को याद है कि दिल्ली के दंगों को पुलिस अधिकारी को चुनौती देकर भड़काने के इनाम स्वरूप कपिल मिश्रा को दिल्ली राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया था। उस दंगे में चालीस लोग मारे गए थे!
इस गिरफ़्तारी की तुलना अब साफ़ साफ़ आपातकाल की गिरफ़्तारियों के साथ जुड़ती जा रही है क्योंकि देश के अनेक स्थानों पर समस्याओं को उठाने की कोशिशें देशद्रोह करार दी जा रही हैं। इस मामले में तो सत्तारूढ़ पार्टी ने स्वयं अपने घोषणा पत्र में छठी अनुसूची के मामले को लागू करने का वायदा किया था जिससे वह मुकर गई है! वांगचुक काफ़ी लंबे समय से इस पर लगातार अपने समाज को नेतृत्व दे रहे थे!
वांगचुक का समुदाय इतना बड़ा भले ही न हो कि उसकी चीख बीजेपी ITcell, सरकार और देश के monstrous मीडिया के सामने भारतीय समुदाय के महासागर में सुनाई दे लेकिन फिर भी इस अन्याय के खिलाफ प्रतिकार की वह एक नज़ीर क़ायम कर गया है!
मनीष सिंह-
न दैन्यम, न पलायनम!! सोनम वांगचुक गिरफ्तार हो गए। रासुका लगा है। सरकार के अनुसार वे शांति के लिए खतरा हैं। मीडिया के अनुसार वे विदेशी दलाल है।
विदेशी एजेंट होना कन्फर्म है। विदेश याने अमेरिका, जर्मनी, दूसरे कुछ यूरोपियन देश, या फिलीपींस भी हो सकता है। यहाँ से उन्हें अवार्ड औऱ फंड मिलता रहा है। उनका विदेशी पैसा का लाइसेंस, सरकार अकारण थोड़े ही कैंसल करेगी?
पर आप मीडिया की न मानोगे। चलो, सोशल मीडिया की तो मान लो। यहाँ उनके नेपाली एजेंट होने की प्रबल सम्भवना है। नेपालियों के लेह हिंसा की शामिल होने की पुख्ता खबर से व्हाट्सप गर्म है।
अब आप यह भी न माने तो अंदर की बात बताते हैं। रियलिटी ये है, कि मुफ्त में दी गयी जमीन का आवंटन रद्द हो जाने पर वे हिंसा भड़का रहे हैं। वे जमीन के 14 करोड़… नहीं नहीं.. 37 करोड़ खा गये। इतने बेईमान हैं कि विश्वविद्यालय की मान्यता भी नहीं लिए। जबकि सरकार तो हाथ में मान्यता पत्र लेकर, पहाड़ों पर उनके पीछे-पीछे दौड़ रही थी।
अरे, आप यह भी नही मानते।तो अब असली कड़वी सचाई सुनो। सोनम वांगचुक लद्दाख में, सेना के लिए हो रहे बुनियादी ढांचा विकास को रोकना चाहते हैं। इसलिए क्योंकि उनके पिता कांग्रेस के मंत्री थे। और वे खुद राहुल गांधी से मिले हुए हैं।
वे एक नकली पर्यावरणविद हैं। असली पर्यावरणविद तो स्ट्रेटॉफियर में शोध करता है, आंदोलन नहीं। आपको याद है न, कि थ्री इडियट फ़िल्म में फ़िल्म में दिखाया था की उनकी डिग्री भी नकली है। वे झूठ भी बोलते हैं। इसलिए रैंचो की नाक लम्बी होकर किस करने के समय, बीच में आ जाती थी।
अब हमारे हमारे इतने सबूतों के बाद भी आप सोनम को गद्दार नही मानते, तो तुम खुद गद्दार हो, भूरी के पिल्ले हो। औऱ तुम्हारी माँ हलाला करवाती है।
लेकिन सोनम इसमें से किसी बात का दोषी नहीं। उसका दोष है- अपने राज्य में पूर्ण सरकार मांगना, अपने कल्चर, पर्यावरण की रक्षा के लिए 6वीं अनुसूची मांगना, दूसरे राज्यो की तरह लोक सेवा आयोग मांगना। ये यह सब मांगे गलत हैं। आंदोलन, भूख हड़ताल, मोदी सरकार के खिलाफ बोलना गलत है।
एक औऱ दोष है। सोनम, महात्मा गाँधी नहीं है। उनमें गांधी जैसी मैच्योरिटी नहीं है। जनआंदोलन दोधारी तलवार होता हैं। अक्सर, उसे चलाने वालों के हाथ से निकल जाता हैं। आंदोलनों में स्वस्फूर्त (या घुसाई गई) अराजकता की तरफ बहने की प्रवृत्ति होती है। कॉडर पर नियंत्रण न हो, तो आंदोलन नहीं करना चाहिए।
तो आंदोलन अगर मोपला के रास्ते, चौरीचौरा पहुँच जाये, तो गांधी उसे वापस ले लेते थे। यह नैतिक बल गांधी में था। सोनम अभी उस स्तर से दूर हैं।
लेकिन बेदाग हैं। 30 साल से लद्दाख क्षेत्र में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, और सतत विकास के लिए जुटे हैं। उनके कार्यों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान है। उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज और ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर जैसे सम्मान मिले हैं। वे NIT श्रीनगर से बी.टेक. औऱ फ्रांस के क्रेटर से अर्थन आर्किटेक्चर के मास्टर हैं।
वे लद्दाख के ग्रामीण बच्चों को, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण के अनुकूल शिक्षा देते है। उनका बर्फ के स्तूप का आविष्कार, लद्दाख जैसे शुष्क क्षेत्रों में पानी की कमी को दूर करने में मदद कर रहा है। इन्हीं अनुभवों को वह लद्दाख में एक विश्वविद्यालय बनाकर पढ़ाना चाहते थे। जो अब आंदोलन के कारण खटाई में है।
लेकिन इस आंदोलन ने उन्हें लेह में मसीहा जैसी छवि दी है। वे मार्च से सितंबर 2024 में लेह से दिल्ली पदयात्रा कर चुके हैं। उन्हें तब भी गिरफ्तार किया गया था। हिरासत में अनशन पर बैठे। पुलिस ने छोड़ दिया। रिहाई के राजघाट पर गांधी को श्रद्धांजलि दी और सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। गृह मंत्रालय के आश्वासन के बावजूद, वे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, या गृह मंत्री से न मिल सके।
ताजा दौर में लेह में हिंसा फैली। इसका दोषी सोनम वांगचुक को ठहराया जा रहा है। उनपर अनर्गल आरोप भी है, सत्ता का कहर उनकी संस्थाओं पर टूटा है। अपनी सफाई में ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, की आज उन्हें गिरफ्तार करके अज्ञात स्थान ले जाया गया। औऱ लद्दाख में इंटरनेट बैन कर दिया गया है।
यह कदम लद्दाख में, भारत सरकार की लोकप्रियता में कोई इजाफा नहीं करेगा। सोनम वांगचुक को भी डराने या झुकाने में सरकार कामयाबी मिलेगी, उम्मीद नहीं। लद्दाख में वे हीरो हो चुके हैं। देश की निगाहें उनपर हैं, और हमारी दुआयें उनके साथ। उनकी मांगें वाजिब, तार्किक, और सामान्य हैं। सभी मांगो, और गांधीवादी तरीको पर सोनम वांगचुक को डटे रहना चाहिए। न दैन्यम, न पलायनम!!
विश्व दीपक-
सोनम वांगचुक नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी जो कि इस देश का सत्ताधारी दल है, वह इस देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है.
दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन सच है. आज लद्दाख में जो गलती भारतीय जनता पार्टी कर रही है वही गलती कांग्रेस ने 80 के दशक में कश्मीर घाटी में की थी. कांग्रेस की सत्ता भले ही कायम रही लेकिन नतीजा देश के लिए अच्छा नहीं रहा.
लद्दाख में जो हुआ वह स्क्रिप्टेड लग रहा है. चार लोगों की मौत के बाद ही प्रदर्शन उग्र हुआ. सवाल है कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था? जिसने भी गोली चलवाई उसे मालूम था कि उसके बाद प्रदर्शन उग्र होगा.
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए SOP बनाए गए हैं. वॉटर कैनन, आंसू गैस का इस्तेमाल, लाठी चार्ज. क्या इनका प्रयोग किया गया? सीधे गोली मारी गई. वह भी सिर में. जिसने भी आदेश दिया था चाहे वह श्रीनगर में बैठा हो या दिल्ली में उसके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए. पारदर्शी तरीके से जांच होना चाहिए. जब तक यह नहीं होगा लोगों का गुस्सा शांत नहीं होगा.
लोकतंत्र का मतलब होता है जनता के हाथ में ताकत देना, विकेंद्रीकरण करना न कि यह मांग करने वालों का गला दबाना. अलग राज्य की मांग करना, संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग करना कोई अपराध है क्या?
सत्ता के नशे में अंधे हो चुके भारतीय जनता पार्टी के नेता, मंत्री अपना ही इतिहास भूल चुके हैं. टूटपंजिए ट्रॉल आर्मी जिनकी पैदाइश ही व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में हुई है उनकी बात ही क्या की जाए!
छोटे राज्यों का निर्माण भारतीय जनता पार्टी की सोच और संविधान का हिस्सा है. अटल जी के दौर में 3 नए राज्य बनाए गए थे. कोई भी देश माई वे ऑर हाई वाले तरीके से नहीं नहीं चलता. इस बात को जितना जल्दी समझ लें, उतना बेहतर.

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