पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुआवजे में 21 लाख 33 हजार 668 रुपये की बढ़ोतरी की।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। खेती से भी आय है और कृषि आय को नजरअंदाज करना गलत है। इस टिप्पणी के साथ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक कंपनी के क्लस्टर ऑफिसर की पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में 21 लाख 33 हजार 668 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।
फैसला सुनाते समय जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा मृतक की कृषि आय को नजरअंदाज करना कानून और साक्ष्यों दोनों के विपरीत था। रिकाॅर्ड पर मौजूद इनकम टैक्स रिटर्न और जमाबंदी से यह सिद्ध था कि मृतक नियमित रूप से खेती से भी आय अर्जित कर रहा था।
31 वर्षीय जगराज सिंह की 22 अगस्त 2022 को सड़क हादसे से जान चली गई थी। वे बठिंडा स्थित एक कंपनी में क्लस्टर ऑफिसर थे और उनकी पत्नी अनंतपाल कौर ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा दायर किया था।
बरनाला स्थित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 7 दिसंबर 2023 को उन्हें 57,59,096 रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ दिया था। जगराज सिंह की पत्नी अनंतपाल कौर ने बरनाला की मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अनंतपाल कौर ने बताया कि उनके पति की वास्तविक आय को कम आंका गया है और इससे मुआवजा भी कम तय हुआ है।
हाईकोर्ट के समक्ष वेतन प्रमाणपत्र पेश किया
हाईकोर्ट के समक्ष पत्नी ने वेतन प्रमाणपत्र पेश किया, जिसमें उनके पति का मासिक वेतन 29,447 रुपये दर्शाया गया था, इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2016-17 की जमाबंदी और वर्ष 2019-20 की इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल की, जिसमें 1,25,000 रुपये की कृषि आय दर्शाई गई थी। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने केवल वेतन को आधार बनाया और खेती से होने वाली आय को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि खेती से मिलने वाली आय केवल जमीन से नहीं आती, बल्कि उसके पीछे मृतक की निगरानी, प्रबंधन और श्रम भी जुड़ा होता है और उसकी मृत्यु के बाद परिवार को इस प्रबंधन क्षमता का नुकसान होता है।
इसी आधार पर अदालत ने पंजाब में कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 11,220 रुपये प्रतिमाह को मृतक की कृषि गतिविधियों से जुड़ी आय मानते हुए उसके मासिक वेतन में जोड़ा। इस तरह मृतक की कुल मासिक आय 40,667 रुपये तय की गई। इस तरह कुल मुआवजा 78,92,764 रुपये तय हुआ।
बढ़ी हुई राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा
चूंकि ट्रिब्यूनल पहले ही 57,59,096 रुपये दे चुका था, इसलिए हाईकोर्ट ने शेष 21,33,668 रुपये की अतिरिक्त राशि देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस बढ़ी हुई राशि पर दावा दायर करने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलेगा। प्रतिवादी बीमा कंपनी और अन्य पक्षों को आदेश दिया गया है कि वे दो माह के भीतर पूरी राशि ब्याज सहित ट्रिब्यूनल में जमा करें, जिसे सीधे अनंतपाल कौर के बैंक खाते में भेजा जाएगा। |
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