शाहजी मंदिर का वसंती कमरा।
संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। रंगबिरंगे झाड़-फनूस, कलात्मक दर्पण से निकलती प्रकाश की अद्भुत किरणें और कमरे के बीच फव्वारों के सामने रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान ठाकुर राधारमणलालजू की झलक को अपलक निहारते भक्त कमरे की आभा में डूब गए। मंद-मंद स्वरों में भजनों की धुन पर मन ही मन आनंदित भक्त वसंती कमरे की आभा में डूब गए।
शाहजी मंदिर में वसंती कमरे में विराजकर दर्शन दिए ठाकुर राधारमणलालजू ने
वसंत पंचमी पर शुक्रवार को शाहजी मंदिर के अद्भुत वसंती कमरे में विराजमान होकर ठाकुर राधारमणलालजू ने भक्तों को दर्शन दिए। वसंती कमरे सुबह जब मंदिर के पट खुले तो रंगबिरंगी झाड़ फनूस से झांकती रोशनी भक्तों को आल्हादित कर रही थी। मंदिर में प्रवेश करते ही संमगरमर के टेड़े खंभे और मुंडेर पर रोमन व इटैलियन शैली का झलक जब भक्तों को नजर आई तो मंदिर की ओर खिंचे चले आए।
लखनवी झाड़-फनूस भक्तों को आकर्षित कर रहे थे
वसंती कमरे में लखनवी झाड़-फनूस भक्तों को आकर्षित कर रहे थे, विभिन्न रंगों की झाड़-फनूस, कलात्मक दर्पण, स्वर्ण आभा लिए दीवाल, विशाल गोलाकार छत पर चंदोबा जैसी पच्चीकारी, ऊपर से चारों ओर झांकती विभिन्न मुद्राओं में 12 सखियां कमरे की शोभा बढ़ाती हैं। मंदिर के कलात्मक दर्पण और झाड़-फनूस पर जब विद्युत प्रकाश पड़ा तो वसंती छटा बिखरती नजर आ रही थी। यह कमरा वर्ष में केवल दो बार वसंत पंचमी और रक्षाबंधन पर खोला जाता है। |