वाहनों का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड
धर्मेश अवस्थी, जागरण, लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा नियमों के बार-बार उल्लंघन पर काफी सख्त है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भले ही अब एक वर्ष में पांच बार वाहन का चालान होने पर ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) निलंबित करने का आदेश दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इससे बड़ी सजा पहले से प्रचलित है।
सड़क सुरक्षा नियम के उल्लंघन पर लखनऊ में पांच बार चालान पर 10050 वाहनों का पंजीकरण निलंबित हो चुका है। इतना ही नहीं 31827 और वाहनों का पंजीयन निलंबित करने की प्रक्रिया चल रही है। फरवरी माह के अंत तक सड़क का नियम तोड़ने वाले 20 हजार से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड करने की तैयारी है।
सड़कों पर सावधान होकर वाहन चलाइए, सड़क का कानून तोड़ा तो चालान होना तय मानिए, क्योंकि यातायात व परिवहन विभाग विभिन्न चौराहों व सड़कों पर कैमरों व मोबाइल फोन के जरिए आपके वाहन की गतिविधियों को कैद कर रहा है। वाहनों का चालान बढ़ा तो परेशानी बढ़ना भी तय है।
यातायात पुलिस ने आइटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) कैमरों के माध्यम से राजधानी के विभिन्न हिस्सों में 2025 में वर्षभर निगरानी की थी। पांच या उससे अधिक बार नियमों को तोड़ने वाले वाहनों को चिन्हित किया था, पहली सूची के 13919 वाहनों में से दोपहिया वाहन सर्वाधिक 12393 थे, ये वाहन स्वामी चालान के बाद भी लगातार नियमों को तोड़ते रहे, साथ ही चालान की रकम भी जमा नहीं किया था।
यातायात पुलिस ने दिसंबर 2025 तक तीन बार में कुल 52187 वाहनों का पंजीकरण निरस्त करने के लिए आरटीओ प्रशासन को रिपोर्ट भेजी थी। परिवहन विभाग ने कर्मचारियों की टीम बनाकर यातायात पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों की छानबीन किया। इसमें 5012 वाहनों का डाटा डुप्लीकेट मिला, वहीं 5298 वाहन दूसरे जिले और प्रांतों के मिले। ऐसे में संबंधित जिले को ई-मेल करके वाहन का पंजीयन निलंबित करने की संस्तुति की गई।
एआरटीओ प्रशासन लखनऊ प्रदीप कुमार सिंह 41877 में से 10050 वाहनों का पंजीकरण ने निलंबित कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब 31827 वाहनों का पंजीयन निलंबित करने की प्रक्रिया चल रही है, फरवरी माह के अंत तक 20 हजार वाहनों का पंजीयन निलंबित करने की तैयारी है, शेष मार्च में कार्रवाई होगी।
कार्रवाई में लग रहा समय
यातायात विभाग की रिपोर्ट पर परिवहन विभाग वाहनों का पंजीयन निलंबन पहले इसलिए नहीं कर रहा था, क्योंकि सिर्फ सामान्य चालान के आधार पर पंजीकरण निलंबित नहीं हो सकता था। पंजीयन निलंबन के लिए ड्रंकन ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग या अन्य वजह होना जरूरी था, जबकि ट्रैफिक विभाग की रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं था। ऐसे में वाहनों के प्रपत्र आनलाइन खंगाले गए जिन वाहनों का बीमा, परमिट, पंजीकरण रिनीवल सहित अन्य खामियां मिली उसको आधार बनाकर पंजीयन निलंबित किया गया था। अब तो केंद्रीय मंत्रालय ने पांच चालान पर कार्रवाई करने का आदेश कर दिया है।
ऐसे हुई थी निलंबन की कार्रवाई
एआरटीओ प्रशासन ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 53 के तहत कार्रवाई की थी, जिसमें छह महीने का नोटिस दिया जाता है, यदि कोई जवाब नहीं मिलता है तो पंजीकरण निलंबित कर दिया जाता है।
तीन माह तक वाहन नहीं चला सकेंगे
जिनका पंजीकरण निलंबित हुआ वह तीन माह तक वाहन नहीं चला सकेंगे। संबंधित वाहन स्वामी यदि वाहन चलाते हैं और दुर्घटना होती है तो उन्हें बीमा का क्लेम नहीं मिलेगा साथ ही पंजीकरण या परमिट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। तीन माह बाद भी ऐसे लोगों व वाहनों की निगरानी होगी, चालान बढ़ने पर पंजीकरण निरस्त होगा। |
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