सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंचे मरीज।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर । बिहार के समस्तीपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाए जा रहे सड़क दुर्घटना व अन्य गंभीर मामलों के मरीजों को लगातार दूसरे जिले के मेडिकल कालेज रेफर किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिले में मेडिकल कालेज स्थापित होने के बावजूद वहां ट्रामा केयर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हर दिन सड़क हादसों में घायल लोग सदर अस्पताल पहुंचते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टर मरीजों को दरभंगा या पटना रेफर करना पड़ रहा है। कई बार रेफरल की प्रक्रिया में कीमती समय नष्ट हो जाता है, जिससे मरीज की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ माह में 677 से अधिक गंभीर मरीजों को दूसरे जिला के मेडिकल कालेज में रेफर किया गया है। इनमें करीब 60 प्रतिशत सड़क दुर्घटना के मामले हैं। हर दिन औसतन दो से तीन मरीज रेफर हो रहे हैं, जिससे सदर अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
ट्रामा सुविधा और विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी
मेडिकल कालेज में ट्रामा सेंटर कार्यशील नहीं है। यहां आर्थोपेडिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ रहने के बाद भी इमरजेंसी आपरेशन की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। सीटी स्कैन, आईसीयू बेड और 24 घंटे विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं रहने के कारण गंभीर मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है।
परिजनों पर बढ़ रहा बोझ
दूसरे जिले रेफर किए जाने से मरीजों के परिजनों पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ रहा है। लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, एंबुलेंस की उपलब्धता में भी परेशानी होती है। कई गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन साबित हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा, जमीनी हकीकत अलग
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कालेज में सुविधाओं का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। जल्द ही ट्रामा सेंटर को पूरी तरह चालू करने और विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती की योजना है। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि फिलहाल सदर अस्पताल से लगातार हो रहा रेफरल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रहा है। |
|