भारत का संविधान लिखने के लिए करीब 60 देशों का संविधान पढ़ा।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। आज हम जिस आजादी पर इतना गर्व करते हैं। वह केवल भारतीय संविधान की देन है। जी हां भारत में लोगों को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करने एवं समानता जैसे कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। यही वजह है कि भारतीय संविधान दुनिया के सबसे बेहतरीन संविधानों में से एक है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा कि आज जिस संविधान में लोगों के लिए मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक जैसे अधिकारों को शामिल किया गया है, आखिर उसे लाने का विचार हमारी संविधान समिति के पास कैसे आया?
दरअसल, भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसका मसौदा तैयार करने में हमारे संविधान समिति के महान लोगों ने दिन-रात मेहनत की है। संविधान लिखते समय समिति के पास तमाम सवाल थे- जैसे कानून की किताब कैसी होनी चाहिए, किताब में क्या नियम होंगे और कौन से अधिकार भारतीय नागरिकों की रक्षा करेंगे आदि।
हालांकि मसौदा समिति ने भारतीय संविधान को लिखने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने भारत के लिए एक सर्वोच्च और आदर्श से पूर्ण संविधान लिखने के लिए कई देशों के संविधानों को बारीकी से खंघाला और भारतीय संविधान के लिए सबसे अच्छी मूल बातों का चयन किया।
यहां से हुई संविधान लिखने की शुरुआत
जब सालों बाद भारत उपनिवेशवाद से आजाद हुआ, तो भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि आखिर देश किस आधार पर चलेगा। भारत को एक लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया। इस सभा में कुल 389 सदस्य थे। संविधान सभा की पहली बैठक में डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना गया।
इसके बाद 11 दिसंबर, 1946 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया। हालांकि अब संविधान लिखने के लिए एक होनहार समिति के सदस्यों की जरूरत थी। इसलिए 29 अगस्त, 1947 को संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई, जिसका अध्यक्ष डॉ. बी.आर अंबेडकर को बनाया गया।
60 देशों के संविधान का अध्ययन
भारतीय संविधान में दिए गए सभी तत्वों को बेहद ही इत्मीनान से लिखा गया है। मसौदा समिति ने संविधान को 2 साल 11 महीने और कुल 18 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया था। इसके लिए समिति के अध्ययक्ष ने लगभग 60 देशों के संविधान को बड़े ही ध्यान से पढ़ा था। हालांकि भारतीय संविधान में 10 से ज्यादा देशों के संविधान का मिश्रण है, जिसमें ब्रिटेन, आयरलैंड, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमरीका सबसे प्रमुख है।
इन प्रमुख देशों से मिलकर बना भारत का संविधान
दो सालों से अधिक संघर्ष के बाद भारतीय संविधान 26 नवंबर, 1949 को बनकर तैयार हुआ था। हालांकि इसे भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी, 1950 का लागू किया था। आपको बता दें, भारत के संविधान को दस से ज्यादा देशों के संविधान को मिलाकर बनाया गया है। ऐसे में हम उन देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिन देशों के संविधान से भारतीय संविधान बना है।
संयुक्त राज्य अमरीका: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 से 32 में दिए गए सभी मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान से लिए गए हैं। संविधान में छह मौलिक अधिकारों का वर्णन विस्तार से दिया गया है, जिसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण से मुक्ति का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल है।
आयरलैंड: आयरिश संविधान से नागरिकों की रक्षा के लिए नीति निर्देशक सिद्धांतों को लिया गया है। संविधान के अनुच्छेद-IV में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य का यह पहला कर्तव्य है कि वे इन सिद्धांतों की प्रक्रिया को अच्छे से लागू करें।
कनाडा: कनाडा के संविधान से एक मजबूत केंद्र सरकार और राज्य के विचारों को भारतीय संविधान में शामिल किया गया है।
फ्रांस: समिति के सदस्यों ने फ्रांस के संविधान से \“गणतंत्र\“ की अवधारणा और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श को भारतीय संविधान में शामिल किया है।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया के संविधान से व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता के प्रावधानों को लिया गया है। इसका वर्णन भारतीय संविधान में अनुच्छेद 301-307 में किया गया है।
दक्षिण अफ्रीका: दक्षिण अफ्रीका के संविधान से संविधान में संशोधन की प्रक्रिया को लिया गया है।
जर्मनी: जर्मनी के संविधान से संशोधन के दौरान मौलिक अधिकारों के निलंबन का प्रावधान के बार में विस्ताक से बताया गया है।
ब्रिटेन: भारतीय संविधान में संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता का विचार, कानून बनाने की प्रक्रिया जैसे विचारों को शामिल किया गया है।
सोवियत संघ: सोयियत संघ की सरकार से सोवियत संघ में वर्णित मौलिक कर्तव्य और अर्थव्यवस्था की व्यवस्था के लिए संविधान द्वारा योजना के प्रवाधान को शामिल किया गया है।
जापान: भारतीय संविधान में कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के प्रावधान को जापान के संविधान से लिया गया है।
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