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रमेश चंद्रा, नैनीताल l आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज 3.6 आप्टिकल दूरबीन ( डाट) को हाई रेज्युलेशन स्पेक्ट्रोग्राफ तकनीक ईजाद करने जा रहा है। यह अत्याधुनिक तकनीक है, जो देश में पहली बार विकसित की जाएगी। इस तकनीक को विकसित करने में एक वर्ष का समय लगेगा।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के निदेशक डा. मनीष नाजा ने बताया कि खगोलीय क्षेत्र में एरीज विश्व स्तरीय तकनीक व सुविधाएं जुटाने के लिए प्रतिबद्ध है। हाई रेज्युलेशन स्पेक्ट्रोग्राफ तकनीक अत्याधुनिक तकनीक है, जो दुनिया के चुनिंदा देशों में उपलब्ध है। इस तकनीक के विकसित हो जाने से एरीज की 3.6 मीटर आप्टिकल दूरबीन हाईटेक हो जाएगी। इस तकनीक के जरिए सुदूर अंतरिक्ष में ग्रह नक्षत्रों की बारीकी से अध्ययन आसान हो जाएगा।
उच्च विभेदन स्पेक्ट्रोग्राफ एक ऐसा उपकरण है, जो प्रकाश व अन्य तरंगों के स्पेक्ट्रम को रिकार्ड कर सकता है और विभिन्न तरंगदैर्घ्यों को अलग-अलग करके दिखा सकता है। साथ ही स्पेक्ट्रम में बहुत छोटे-छोटे अंतर भी स्पष्ट रूप से अलग करके देख और नापने में सक्षम होता है। यह खगोल विज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान में तारों, ग्रहों या अन्य स्रोतों के बहुत बारीक रासायनिक और गति संबंधी विवरण जानने के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह अत्याधुनिक तकनीक है।
तारों की दुनिया में बाइनरी स्टार्स के आसपास गैस का पता लगा सकता है। साथ ही युवा तारों के डिस्क यानी तारे के चारों दिशाओं का गहन अध्ययन करने में सक्षम है। वर्तमान में दुनिया की सभी बड़ी स्पेस एजेंसियां इस तकनीक को अपना रहे है। इस तकनीक के जरिए आए दिन ब्रह्मांड के ग्रह, नक्षत्रों, ब्लैक होल व डार्क मैटर जैसे रहस्यों को उजागर हो रहे हैं।
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