संवाद सूत्र, चांदन (बांका)। प्रखंड क्षेत्र में फार्मर आईडी निर्माण की प्रक्रिया किसानों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बनती जा रही है। जमीन के कागजात, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में नाम की वर्तनी में मामूली अंतर के कारण बड़ी संख्या में किसान फार्मर आईडी से वंचित हैं। कई मामलों में जमीन पूर्वजों के नाम से दर्ज होने के कारण सत्यापन में अतिरिक्त दिक्कतें सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रखंड में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के करीब 26 हजार लाभुक पंजीकृत हैं, लेकिन अब तक महज लगभग 2500 किसानों की ही फार्मर आईडी बन सकी है।
इनमें भी कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी आईडी तो बन गई है, लेकिन दस्तावेजी त्रुटियों के कारण उन्हें पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शेष किसानों की फार्मर आईडी नाम और जमीन संबंधी विसंगतियों के चलते अटकी हुई है।
कई किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे पीएम किसान सहित अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाएंगे। प्रशासन से मांग की है कि दस्तावेज सुधार की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
अंग्रेजी में नाम सही है, लेकिन हिंदी में एक अक्षर की गलती के कारण फार्मर आईडी नहीं बन रही। कई दिनों से कृषि और अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी समाधान नहीं मिल रहा। - लालमोहन पांडेय
सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आईडी जरूरी है, लेकिन छोटी-सी गलती के कारण हमें परेशान होना पड़ रहा है। हर बार नया कागज लाने को कहा जाता है। प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरुरत है। - शिवलाल मुर्मू , गौरीपुर
आधार कार्ड और जमीन की रसीद में नाम की वर्तनी में थोड़ा भी अंतर होने पर ऐप डाटा स्वीकार नहीं कर रहा है। जब तक दस्तावेजों में सुधार नहीं कराया जाता, तब तक फार्मर आईडी बन पाना संभव नहीं है। - सौरभ कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, चांदन |
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