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यूपी की इन ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगी नई पहचान, ASI ने संरक्षण और मरम्मत कार्यों को दी मंजूरी

LHC0088 2026-1-23 10:27:10 views 1253
  

ऋषियन (रिखैन) गुफा में स्थित शिवलिंग



जागरण संवाददाता, चित्रकूट। तपोभूमि की ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों को संरक्षित कर उन्हें नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर गणेश बाग कर्वी उपमंडल के अंतर्गत आने वाले प्राचीन स्मारकों के संरक्षण एवं मरम्मत कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों से न केवल धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी क्षेत्र को नया आयाम मिलेगा।

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण झांसी मंडल ने ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और देखभाल के लिए चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत किए हैं। वरिष्ठ संरक्षक सहायक तारक सिंह ने बताया कि सभी कार्यों को लेकर नोटिफिकेशन जारी हो चुका है और यह सभी स्मारक राष्ट्रीय धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

मऊ तहसील अंतर्गत ग्राम बरहा कोटरा में स्थित रिखैन (ऋषियन) के नाम से प्रसिद्ध दो बड़ी गुफाओं और सपाट छत वाले लघु मंदिर के संरक्षण एवं मरम्मत का कार्य किया जाएगा। इसमें रिखैन गुफा के बाहर बने चबुतरे पर स्थित छोटे मंदिरों का संरक्षण, चबुतरे की मरम्मत और मंदिर की मूल वास्तुकला के अनुरूप सीढ़ियों का निर्माण शामिल है।

इसी गांव में स्थित 10वीं शताब्दी के प्रसिद्ध भार देओल (शिव) मंदिर के अवशेषों के संरक्षण का कार्य स्वीकृत किया गया है। इस कार्य के तहत गर्भगृह की दीवारों का एसलर स्टोन से संरक्षण एवं मरम्मत की जाएगी और मंदिर की वास्तुकला से जुड़े पत्थरों का उपयोग किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पहले चरण में मंदिर के प्लेटफॉर्म और चारों ओर की पत्थर की दस परतों तक का संरक्षण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। तीसरे प्रस्ताव के तहत तहसील कर्वी के ग्राम गोंडा में एक ही अधिष्ठान पर स्थित दो चंदेलकालीन मंदिरों के परिसर का विकास किया जाएगा।

इसमें लोहे की ग्रिल लगाना, बाउंड्रीवॉल ऊंची करना, मंदिरों का संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पेशवाकालीन गणेश बाग कर्वी स्थित प्रस्तर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए शौचालय निर्माण का कार्य भी स्वीकृत किया गया है, जिसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

इन संरक्षण कार्यों से चित्रकूट की ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत को संजोने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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