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Saraswati Puja 2026 Shubh Muhurat: अबूझ मुहूर्त में होगा मां शारदे का वंदन, रात तक है पूजा का विशेष योग

cy520520 2026-1-23 05:26:08 views 1259
  

सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त



संवाद सूत्र, उदवंतनगर(आरा)। वसंत पंचमी या श्रीपंचमी आज मनाई जा रही है। इस पर्व पर माता सरस्वती, कामदेव और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। पंडित विवेकानंद पांडेय ने बताया कि गुरुवार की रात में 01:17 बजे ही पंचमी तिथि का आगमन हो गया, जो आज शुक्रवार को रात में 12.08 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार आज पूरे दिन वसंत पंचमी की पूजा की जा सकेगी।

वसंत पंचमी को वाणी पूजा ,सरस्वती पूजा, तक्षक पूजा ,बागेश्वरी जयंती, लेखनी पूजन,आम्र मंजरी भक्षण,रतिकाम महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। यह विद्यार्थियों का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन मां सरस्वती की उपासना कर विद्या की कामना की जाती है।  
देवी देवताओं को चढ़ाया जाता है अबीर व गुलाल

माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत कला, विज्ञान और शिल्प कला की देवी माना जाता है। भोजपुर में वसंत पंचमी को पहला फगुआ कहा जाता है। इस दिन अबीर व गुलाल भी देवी देवताओं को चढ़ाया जाता है तथा ध्वजारोपण भी किया जाता है।  

भोजपुरांचल के गांवों में ताल ठोकने की पुरानी परंपरा है। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है। इस दिन को नवीन कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है।
वसंत सबसे खुशनुमा मौसम

भारत में बसंत ऋतु सबसे प्रिय मौसम होता है। इसे ऋतुराज कहा जाता है। वातावरण में अधिक शितलता और अधिक गर्माहट नहीं होती। प्रकृति जब पूरे सबाब पर होती है तो बसंतोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान फूलों पर बहार आ जाती हैं। खेतों में चारों ओर सरसों का फूल सोने की तरफ चमकता है। जौ और गेहूं पर बालियां खिलने लगती हैं। आम के पेड़ों पर मंजर दिखाई देने लगते हैं।  

भंवरों के भवराने की आवाज सुनाई देने लगती है। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने का पांचवां दिन को बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसमें वाग्देवी के साथ ही भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है। इस दिन बच्चों को खल्ली पकड़ा कर पढ़ाई की शुरुआत करने की परम्परा है।
विद्यार्थियों का है सबसे बड़ा त्योहार

वसंत पंचमी के दिन को ज्ञान की देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन विद्यार्थी माता सरस्वती की अराधना कर विद्या व वैभव की कामना करते हैं। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत,कला, विज्ञान व शिल्प कला की देवी माना जाता है। विद्यार्थी इसे धूमधाम से मनाते हैं। जगह जगह मां सरस्वती की प्रतिमा रखी जाती है और तरह तरह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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