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झारखंड में 750 करोड़ रुपये का हुआ शराब घोटाला; आरोपितों को मिल रहा चार्जशीट नहीं होने का लाभ

LHC0088 2026-1-22 06:26:35 views 861
  

झारखंड में घोटाला अब करीब 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है।




राज्य ब्यूरो,रांची। राज्य में शराब घोटाला मामले में एसीबी की जांच जारी है। 20 मई 2025 को एसीबी थाना रांची में दर्ज केस 38 करोड़ रुपये के राजस्व घोटाला मामले में दर्ज हुआ था। यह घोटाला अब करीब 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है।

इस मामले में आठ माह के भीतर एक भी चार्जशीट नहीं होने से गिरफ्तार 17 आरोपितों में 14 को डिफाल्ट बेल मिल चुकी है। एक आरोपित को गोवा में ट्रांजिट बेल मिला था, जिसके बाद से ही वह फरार है।

जिन्हें उक्त केस में जमानत का लाभ मिल चुका है, उनमें दो आइएएस अधिकारी निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे व पूर्व उत्पाद आयुक्त सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी अमित प्रकाश शामिल हैं।

इनके अलावा तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह, पूर्व महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार दास, पूर्व महाप्रबंधक वित्त सह अभियान सुधीर कुमार, प्लेसमेंट एजेंसी मार्शन के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया, होलोग्राम

आपूर्ति कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी के विधु गुप्ता, श्री ओम साईं बेवरेजेज के अतुल कुमार सिंह, मुकेश मनचंदा, सुमित फसिलिटीज के निदेशक अमित प्रभाकर सुलौंकी, प्लेसमेंट एजेंसी विजन हास्पिटालिटी सर्विसेज के निदेशक परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर व महेश शिडगे को भी जमानत का लाभ मिल चुका है।

वर्तमान में मेसर्स मार्शन के निदेशक जगन तुकाराम देसाई, छत्तीसगढ़ का देसी शराब आपूर्ति करने वाला कारोबारी राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल अभी जेल में हैं। देसी शराब आपूर्ति करने वाला छत्तीसगढ़ का दूसरा कारोबारी नवीन केडिया गोवा में ट्रांजिट बेल मिलने के बाद से फरार है।
ऐसे बढ़ती गई घोटाले की राशि

20 मई 2025 को दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगा था कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे ने पद का दुरुपयोग कर आपराधिक साजिश के तहत मानकों को पूरा नहीं करने वाली दो प्लेसमेंट एजेंसियों मेसर्स मार्शन व मेसर्स विजन को मैनपावर आपूर्ति का ठेका दिया। दोनों ने फर्जी बैंक गारंटी देकर ठेका लिया था, जिससे राज्य सरकार को 38 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा था।

इनके अलावा छत्तीसगढ़ के कारोबारी विधु गुप्ता के नियंत्रण वाली नोयडा की कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को शराब की बोतलों के लिए 52 करोड़ रुपये का होलोग्राम की आपूर्ति का ठेका मिला था, जिसने नकली होलोग्राम की आपूर्ति की थी।

इतना ही नहीं, झारखंड में ब्लैकलिस्ट की गईं छत्तीसगढ़ की चार प्लेसमेंट एजेंसियों पर झारखंड का करीब 450 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके बावजूद शराब आपूर्ति करने वाली छत्तीसगढ़ की दो शराब कंपनियों को पूर्व के उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश ने 11 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान कर दिया था।

इन कंपनियों में मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स ओम साईं विबरेजेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। झारखंड में देसी शराब आपूर्ति करने वाली छत्तीसगढ़ की वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड व छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी ने निम्न स्तर के देसी शराब की आपूर्ति की थी। इसके चलते भी विभाग को करीब 200 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान पहुंचा था।
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