LHC0088 • 6 hour(s) ago • views 616
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग और विधायकों की निरंतर क्षमता-वृद्धि से ही विधायिकाओं को अधिक मजबूत, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए विधायी प्रक्रियाओं में गुणवत्ता के स्पष्ट मानक तय किए जाने चाहिए।
लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के दूसरे दिन तीन प्रमुख विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इनमें पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, विधायकों की क्षमता-वृद्धि के माध्यम से कार्यकुशलता में सुधार तथा जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही शामिल रही।
अलग-अलग सत्रों में हुई चर्चाओं में लोक सभा अध्यक्ष खुद उपस्थित रहे। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने सत्रों का संचालन किया। ओम बिरला ने देशभर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा विधायकों की शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर अनुभवों की पहचान कर उनके रचनात्मक उपयोग की पहल को भी उल्लेखनीय बताया।
पूर्ववर्ती सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्कृष्टता, नवाचार और तकनीक के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लोकतांत्रिक शासन को और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने देहरादून में वर्ष 2019 में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की चर्चाओं को स्मरण करते हुए बताया कि विधायी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली में सुधार उनके दीर्घकालिक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है।
इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो देशभर की विधायी संस्थाओं में प्रक्रियाओं और प्रथाओं के मानकीकरण से जुड़े विषयों पर विचार कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श से विधायिकाओं की कार्यकुशलता बढ़ेगी और लोकतंत्र को नई मजबूती मिलेगी। |
|